तमिलनाडु में टाटा मोटर्स–JLR की नई फैक्ट्री शुरू: एमके स्टालिन ने किया पहला लैंड रोवर इवोक रोल-आउट

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तमिलनाडु के औद्योगिक मानचित्र पर एक नया और अहम अध्याय जुड़ गया है। टाटा मोटर्स और Jaguar Land Rover की नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का औपचारिक उद्घाटन भव्य समारोह के साथ किया गया। इस ऐतिहासिक मौके पर मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने संयंत्र में निर्मित पहला लैंड रोवर इवोक मॉडल रोल-आउट कर फैक्ट्री का उद्घाटन किया और प्रतीकात्मक रूप से वाहन चलाकर उत्पादन की शुरुआत की।

टाटा समूह के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने इस दिन को टाटा मोटर्स और पूरे टाटा परिवार के लिए “स्वर्णिम दिन” बताया। उन्होंने कहा कि यह एकीकृत विनिर्माण संयंत्र अत्याधुनिक तकनीक से लैस है और यहां सालाना 2.5 से 3 लाख वाहनों के निर्माण की क्षमता विकसित की गई है। उन्होंने राज्य सरकार के सहयोग, तेज मंजूरियों और सुचारु समन्वय की खुले दिल से सराहना की।

चंद्रशेखरन ने याद दिलाया कि सितंबर 2024 में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इस परियोजना का शिलान्यास करते समय 16 महीनों के भीतर उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य दिया था—और आज वही लक्ष्य समय से पूरा हो गया। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री और पूरी प्रशासनिक टीम का आभार जताया। उनके मुताबिक, यह संयंत्र टाटा मोटर्स और JLR के लिए एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित होगा।

इस अवसर पर यह भी रेखांकित किया गया कि तमिलनाडु में टाटा समूह की मौजूदगी लगातार मजबूत हो रही है। राज्य में पहले से TCS, Tata Power, Tata Chemicals, Taj Hotels और Tata Electronics जैसे टाटा ग्रुप के बड़े निवेश मौजूद हैं, जो तमिलनाडु को उद्योग और टेक्नोलॉजी का प्रमुख केंद्र बना रहे हैं। उद्योग मंत्री टीआरबी राजा सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस परियोजना में सहयोग के लिए प्रशंसा बटोरी।

नई JLR फैक्ट्री से कम से कम 5,000 प्रत्यक्ष नौकरियों के सृजन की उम्मीद है। इसके अलावा, आसपास एंसिलरी और सप्लाई-चेन यूनिट्स के स्थापित होने से अप्रत्यक्ष रोजगार के हजारों अवसर पैदा होंगे। मंत्री टीआरबी राजा ने कहा कि यह निवेश भारत में लक्ज़री ऑटोमोबाइल सेगमेंट के विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम है।

करीब ₹9,000 करोड़ के निवेश से विकसित यह ग्रीनफील्ड परियोजना रिकॉर्ड समय में पूरी की गई है। सरकार और टाटा समूह के बीच मजबूत तालमेल को इसकी सबसे बड़ी वजह बताया गया। अधिकारियों के मुताबिक, यह केवल पहला चरण है—आने वाले समय में दूसरे और तीसरे चरण के विस्तार की भी योजना है, जिससे उत्पादन क्षमता और निवेश दोनों बढ़ेंगे।

खास बात यह है कि इस संयंत्र में ICE (आंतरिक दहन इंजन) वाहनों के साथ-साथ EV (इलेक्ट्रिक व्हीकल) का भी निर्माण किया जाएगा। इससे तमिलनाडु को भविष्य की मोबिलिटी और इलेक्ट्रिक व्हीकल इकोसिस्टम का अहम केंद्र बनाने में मदद मिलेगी। यहां काम करने वाले युवाओं की भर्ती राज्य की कौशल विकास पहल ‘नान मुदलवन’ कार्यक्रम के जरिए की गई है, जिससे विशेष रूप से रणिपेट जिले के स्थानीय युवाओं को बड़ा अवसर मिला है।

राज्य सरकार को उम्मीद है कि इस परियोजना के बाद तमिलनाडु में और बड़े निवेश आएंगे, जिनके संकेत आगामी कन्वर्जेंस कॉन्क्लेव में मिल सकते हैं। कुल मिलाकर, यह फैक्ट्री न सिर्फ औद्योगिक विकास का प्रतीक है, बल्कि रोजगार, तकनीक और भविष्य की मोबिलिटी की दिशा में तमिलनाडु के बढ़ते कद का मजबूत संदेश भी देती है।

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