आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी, गलत खानपान और कम फिजिकल एक्टिविटी के चलते हाई यूरिक एसिड एक आम लेकिन खतरनाक समस्या बनती जा रही है। शुरुआत में यह हल्के जोड़ों के दर्द, सूजन या चलने-फिरने में परेशानी के रूप में दिखती है, लेकिन समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यही दिक्कत आगे चलकर गाउट, किडनी स्टोन और जोड़ों की गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। राहत की बात यह है कि यूरिक एसिड को कंट्रोल करने के लिए हर बार दवाइयों पर निर्भर रहना जरूरी नहीं—थोड़े से डाइट और लाइफस्टाइल बदलाव से इसे काफी हद तक मैनेज किया जा सकता है।
यूरिक एसिड दरअसल शरीर में प्यूरीन के टूटने से बनता है। जब प्यूरीन ज्यादा मात्रा में शरीर में पहुंचता है या किडनी उसे सही तरीके से बाहर नहीं निकाल पाती, तब इसका स्तर बढ़ने लगता है। ज्यादा रेड मीट, शराब, मीठे ड्रिंक्स और प्रोसेस्ड फूड इसका बड़ा कारण माने जाते हैं। ऐसे में सबसे पहला कदम होता है—अपने खाने की थाली को समझदारी से चुनना।
लो-फैट डेयरी प्रोडक्ट्स जैसे दूध, दही और छाछ यूरिक एसिड को बाहर निकालने में मददगार माने जाते हैं। इनमें मौजूद प्रोटीन यूरिक एसिड के स्तर को संतुलित रखने में सहायक होता है। इसके साथ ही चेरी और बेरीज़ जैसे स्ट्रॉबेरी और ब्लूबेरी सूजन कम करने में मदद करती हैं। इन फलों में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स यूरिक एसिड के असर को हल्का करने में सहायक माने जाते हैं।
हरी सब्ज़ियां भी हाई यूरिक एसिड वालों के लिए सुरक्षित विकल्प हैं। लौकी, तोरी, खीरा, पालक और अन्य पत्तेदार सब्ज़ियां शरीर को हाइड्रेट रखती हैं और मेटाबॉलिज्म सुधारने में मदद करती हैं। चूंकि ये प्यूरीन में कम होती हैं, इसलिए इन्हें रोज़मर्रा की डाइट में बेझिझक शामिल किया जा सकता है। इसके साथ पर्याप्त मात्रा में पानी पीना सबसे आसान और असरदार उपाय है। ज्यादा पानी किडनी को एक्टिव रखता है और अतिरिक्त यूरिक एसिड को यूरिन के जरिए बाहर निकालने में मदद करता है।
साबुत अनाज जैसे ब्राउन राइस, ओट्स, ज्वार और बाजरा भी फायदेमंद माने जाते हैं। ये शरीर को एनर्जी देने के साथ-साथ यूरिक एसिड लेवल को स्थिर रखने में मदद करते हैं। वहीं दूसरी तरफ, रेड मीट, ऑर्गन मीट, शराब, ज्यादा मीठे पेय पदार्थ और तला-भुना प्रोसेस्ड फूड यूरिक एसिड को तेजी से बढ़ा सकते हैं, इसलिए इनसे दूरी बनाना जरूरी है।
अगर सही समय पर खानपान में सुधार और अच्छी आदतें अपना ली जाएं, तो हाई यूरिक एसिड को बढ़ने से रोका जा सकता है और जोड़ों व किडनी को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।