भारत और अमेरिका के बीच हुए नए व्यापार समझौते ने प्रीमियम ऑटोमोबाइल और बड़ी मोटरसाइकिलों के शौकीनों के चेहरे खिला दिए हैं। इस डील के तहत अमेरिका से आयात होने वाली चुनिंदा लग्ज़री बाइक्स और हाई-इंजन क्षमता वाली कारों पर इंपोर्ट ड्यूटी में बड़ी राहत दी गई है। नतीजा यह कि Harley-Davidson जैसी आइकॉनिक मोटरसाइकिलें और Jeep व Tesla जैसी कारें अब भारतीय बाजार में पहले से कम कीमत पर पहुंच सकती हैं।
समझौते की खास बात यह है कि सरकार ने टैक्स में कटौती को बेहद टार्गेटेड रखा है। राहत उन सेगमेंट्स तक सीमित है, जहां घरेलू उत्पादन बेहद कम है। इससे “मेक इन इंडिया” या भारतीय ऑटो कंपनियों पर किसी तरह का नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा—बल्कि उपभोक्ताओं को प्रीमियम विकल्प ज्यादा किफायती मिलेंगे।
डील के मुताबिक, 800cc से 1,600cc इंजन क्षमता वाली अमेरिकी मोटरसाइकिलों पर इंपोर्ट ड्यूटी शून्य कर दी गई है। यानी बड़ी हार्ले बाइक्स अब बिना टैक्स के भारत में आ सकेंगी—यह मांग अमेरिका लंबे समय से कर रहा था। वहीं 3,000cc से ज्यादा पावरफुल इंजन वाली कारों पर टैक्स 110% से घटाकर सीधे 50% कर दिया गया है, और अगले 10 वर्षों में इसे चरणबद्ध तरीके से शून्य करने का रोडमैप तय किया गया है। इससे जीप और टेस्ला जैसी हाई-एंड कारों के लिए भारत में एंट्री और आसान होगी।
जानकारों का कहना है कि यह बदलाव आम ग्राहकों के रोज़मर्रा के सेगमेंट को प्रभावित नहीं करेगा। भारत में सबसे ज्यादा बिक्री 110cc से 250cc वाली बाइक्स की होती है—जो करोड़ों की संख्या में बिकती हैं। महंगी और भारी बाइक्स या लग्ज़री कारें एक सीमित प्रीमियम वर्ग तक ही सीमित रहती हैं। इसलिए यह राहत खास तौर पर उन उत्साही ग्राहकों के लिए है, जो इंटरनेशनल ब्रांड्स का अनुभव चाहते हैं।
कुल मिलाकर, यह व्यापार समझौता दोहरा फायदा देता दिख रहा है—एक तरफ भारतीय ग्राहकों को प्रीमियम गाड़ियों के बेहतर दाम और विकल्प मिलेंगे, दूसरी तरफ घरेलू उद्योग की सुरक्षा भी बनी रहेगी। ऑटो सेक्टर में यह कदम भारत–अमेरिका आर्थिक रिश्तों को नई रफ्तार देने वाला साबित हो सकता है।