आज की कॉरपोरेट लाइफ में ज्यादातर लोग सुबह से शाम तक डेस्क और स्क्रीन के बीच कैद रहते हैं। ऑफिस की डेस्क जॉब पहली नजर में आरामदायक लगती है, लेकिन हकीकत यह है कि लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना शरीर के लिए धीरे-धीरे जहर जैसा काम करता है। शुरुआत में हल्का दर्द या थकान महसूस होती है, लेकिन समय के साथ यही आदत कई गंभीर शारीरिक समस्याओं की वजह बन जाती है।
हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि घंटों बैठकर काम करना अब एक ‘साइलेंट हेल्थ रिस्क’ बन चुका है। लगातार बैठे रहने से शरीर की प्राकृतिक मूवमेंट रुक जाती है, जिससे मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और ब्लड सर्कुलेशन भी प्रभावित होता है। इसका असर सिर्फ कमर या गर्दन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे शरीर की सेहत पर पड़ता है।
लंबे समय तक कुर्सी पर बैठे रहने से सबसे पहले कमर और पीठ पर दबाव पड़ता है। गलत पोस्चर में बैठने से रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त स्ट्रेस आता है, जिससे लोअर बैक पेन और कमर में जकड़न की शिकायत शुरू हो जाती है। कई मामलों में यही समस्या आगे चलकर स्लिप डिस्क या क्रॉनिक बैक पेन का रूप ले सकती है। इसी तरह लैपटॉप या कंप्यूटर स्क्रीन की ओर झुककर बैठने से गर्दन और कंधों की मांसपेशियां अकड़ने लगती हैं, जिससे सर्वाइकल पेन, सिरदर्द और कंधों में भारीपन महसूस होता है।
लगातार बैठने की आदत वजन बढ़ने का खतरा भी बढ़ा देती है। जब शरीर ज्यादा मूव नहीं करता, तो कैलोरी बर्न होने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इसका नतीजा यह होता है कि मोटापा, डायबिटीज और दिल से जुड़ी बीमारियों का जोखिम बढ़ने लगता है। इतना ही नहीं, लंबे समय तक बैठकर काम करने से पाचन तंत्र भी प्रभावित होता है। कब्ज, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं, खासकर तब जब खाने का समय अनियमित हो और फिजिकल एक्टिविटी ना के बराबर हो।
ब्लड सर्कुलेशन पर भी इसका सीधा असर पड़ता है। घंटों बैठे रहने से पैरों में रक्त का प्रवाह ठीक से नहीं हो पाता, जिससे सूजन, सुन्नपन और झनझनाहट महसूस हो सकती है। कुछ मामलों में यह समस्या वैरिकोज वेन्स जैसी गंभीर स्थिति में भी बदल सकती है।
हालांकि थोड़ी-सी सावधानी अपनाकर इन समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है। काम के दौरान हर कुछ समय में उठकर चलना, सही पोस्चर बनाए रखना, हल्की स्ट्रेचिंग करना और पर्याप्त पानी पीना शरीर को एक्टिव रखता है। अगर संभव हो तो एर्गोनॉमिक चेयर या स्टैंडिंग डेस्क का इस्तेमाल भी फायदेमंद साबित हो सकता है। डेस्क जॉब भले ही मजबूरी हो, लेकिन सेहत के साथ समझौता करना जरूरी नहीं।
(Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।)