जरूरत की खबर: आपका मोटापा फैट है या वाटर वेट? समझिए फर्क, कारण और खतरे के संकेत

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हमारे शरीर का लगभग 60% हिस्सा पानी से बना है। यही पानी ब्लड सर्कुलेशन, पाचन, तापमान नियंत्रण और कोशिकाओं के कामकाज में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन जब यही पानी जरूरत से ज्यादा शरीर में जमा होने लगे तो वजन अचानक बढ़ जाता है, शरीर फूला-फूला लगता है और भारीपन महसूस होता है। इस स्थिति को “वाटर वेट” या “वॉटर रिटेंशन” कहा जाता है।

अक्सर लोग अचानक बढ़े वजन को फैट समझ लेते हैं, जबकि कई बार यह सिर्फ अतिरिक्त पानी होता है। तो कैसे पहचानें कि आपका वजन फैट है या वाटर वेट? और कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है? आइए विस्तार से समझते हैं।

वाटर वेट क्या है और फैट से कैसे अलग है?

वाटर वेट तब होता है जब शरीर के टिश्यूज में जरूरत से ज्यादा पानी जमा हो जाता है। यह कुछ दिनों या हफ्तों के लिए हो सकता है।

फैट वेट तब बढ़ता है जब शरीर में फैट सेल्स की मात्रा बढ़ जाती है। यह धीरे-धीरे बढ़ता है और कम होने में भी समय लेता है।

वाटर वेट की खास पहचान यह है कि:

  • वजन 1-3 किलो तक अचानक बढ़ या घट सकता है

  • चेहरे, पेट, हाथ या पैरों में सूजन दिख सकती है

  • त्वचा दबाने पर कुछ सेकंड के लिए गड्ढा बन सकता है

  • शरीर भारी और तना हुआ महसूस होता है

जबकि फैट वेट धीरे-धीरे बढ़ता है और उसमें सूजन नहीं होती।

शरीर पानी क्यों स्टोर करता है?

हमारा शरीर हमेशा संतुलन बनाए रखने की कोशिश करता है। जब उसे लगता है कि नमक-पानी का बैलेंस बिगड़ रहा है, तो वह पानी जमा करना शुरू कर देता है।

मुख्य कारण ये हो सकते हैं:

1. ज्यादा नमक (सोडियम) का सेवन
नमक बढ़ने पर शरीर सोडियम को संतुलित करने के लिए पानी रोकता है।

2. कम पानी पीना
सुनने में अजीब लगे, लेकिन जब आप कम पानी पीते हैं तो शरीर डिहाइड्रेशन के डर से पानी जमा करने लगता है।

3. हार्मोनल बदलाव
पीरियड्स, प्रेग्नेंसी, थायरॉइड असंतुलन या कुछ दवाओं के कारण भी वाटर रिटेंशन हो सकता है।

4. स्ट्रेस
तनाव बढ़ने पर कॉर्टिसोल हार्मोन रिलीज होता है, जो शरीर को “इमरजेंसी मोड” में डाल देता है और पानी-सोडियम जमा करवाता है।

5. सिडेंटरी लाइफस्टाइल
लंबे समय तक बैठे रहने से ब्लड सर्कुलेशन धीमा पड़ता है और शरीर में सूजन बढ़ सकती है।

अचानक वजन बढ़े तो क्या समझें?

अगर आपका वजन 1-2 दिन में तेजी से बढ़ा है, तो यह फैट नहीं हो सकता। फैट बढ़ने के लिए लगातार ज्यादा कैलोरी लेना और समय लगना जरूरी है।

ज्यादा नमकीन खाना, बाहर का प्रोसेस्ड फूड, नींद की कमी या हार्मोनल बदलाव के बाद अचानक वजन बढ़ा है तो यह वाटर वेट हो सकता है।

अच्छी बात यह है कि वाटर वेट जितनी तेजी से बढ़ता है, उतनी ही तेजी से घट भी सकता है।

कैसे पहचानें कि वजन फैट है या वाटर वेट?

कुछ आसान संकेत देखें:

  • क्या वजन रोज बदल रहा है?

  • क्या पैरों या चेहरे पर सूजन दिख रही है?

  • क्या नमक कम करने और पानी बढ़ाने से 3-4 दिन में वजन घट गया?

अगर हां, तो यह वाटर वेट हो सकता है।
अगर वजन महीनों से धीरे-धीरे बढ़ रहा है और सूजन नहीं है, तो वह फैट हो सकता है।

वाटर वेट कम करने के आसान उपाय

घबराने की जरूरत नहीं है। कुछ छोटे बदलाव मदद कर सकते हैं:

  • रोज पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं

  • नमक और प्रोसेस्ड फूड कम करें

  • हल्की एक्सरसाइज, वॉक या योग करें

  • 7-8 घंटे की नींद लें

  • स्ट्रेस कम करें

  • शराब और अत्यधिक कैफीन से बचें

फल, सब्जियां और पोटैशियम से भरपूर आहार (जैसे केला, नारियल पानी) भी शरीर का बैलेंस सुधारते हैं।

कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?

हर सूजन सामान्य नहीं होती। इन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर से मिलें:

  • लंबे समय तक पैरों, टखनों या चेहरे पर सूजन

  • सूजन के साथ सांस फूलना

  • पेशाब कम आना

  • लगातार थकान

  • अचानक वजन बढ़ना और घट न पाना

बार-बार वाटर वेट बढ़ना किडनी, लिवर, हार्ट या थायरॉइड की समस्या का संकेत भी हो सकता है।

निष्कर्ष

हर बढ़ा हुआ वजन फैट नहीं होता। कई बार यह सिर्फ शरीर का अस्थायी वाटर बैलेंस बिगड़ना होता है। अगर वजन अचानक बढ़ा है और कुछ दिनों में कम हो जाता है, तो घबराने की जरूरत नहीं है।

लेकिन अगर सूजन लंबे समय तक बनी रहे या अन्य गंभीर लक्षण साथ हों, तो मेडिकल जांच जरूरी है।

अपने शरीर के संकेतों को समझना ही असली फिटनेस की शुरुआत है।

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