Elon Musk का बड़ा AI प्लान: चांद पर फैक्ट्री, कोडिंग खत्म और ‘एवरीथिंग ऐप’ का सपना

Spread the love

दुनिया के सबसे अमीर उद्योगपति Elon Musk ने अपनी AI कंपनी xAI को लेकर ऐसा विजन पेश किया है, जिसने टेक जगत में हलचल मचा दी है। एक इंटरनल मीटिंग के 45 मिनट लंबे वीडियो में मस्क ने बताया कि उनकी योजना चांद पर AI सैटेलाइट फैक्ट्री लगाने की है। उनका लक्ष्य सूरज की ऊर्जा का बड़ा हिस्सा कैप्चर करना और AI को ब्रह्मांडीय स्तर तक ले जाना है।

सूरज की ऊर्जा का 1% इस्तेमाल करने का लक्ष्य

मस्क का दावा है कि अगर मानवता सूरज की कुल ऊर्जा का सिर्फ 1% भी इस्तेमाल कर सके, तो यह आज पूरी दुनिया की ऊर्जा जरूरत से लाखों गुना ज्यादा होगी। इसी सोच के तहत चंद्रमा पर फैक्ट्रियां लगाने की योजना है, जहां AI सैटेलाइट तैयार किए जाएंगे।

यहां ‘मास ड्राइवर’ तकनीक का इस्तेमाल कर सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में लॉन्च किया जाएगा। मस्क का मानना है कि इससे विशाल AI क्लस्टर बनाए जा सकते हैं, जो आगे चलकर दूसरी गैलेक्सियों तक विस्तार कर सकें।

xAI में बड़ा फेरबदल

मीटिंग में मस्क ने बताया कि कंपनी के स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव किया गया है। फाउंडिंग टीम के 12 सदस्यों में से 6 को बाहर किया जा चुका है। इसे उन्होंने संगठनात्मक पुनर्गठन का हिस्सा बताया।

अब xAI को चार प्रमुख टीमों में बांटा गया है — ग्रोक टीम (चैटबॉट और वॉइस), कोडिंग टीम, इमेजिन टीम (वीडियो जेनरेशन) और सबसे खास ‘मैक्रोहार्ड’ प्रोजेक्ट।

‘मैक्रोहार्ड’ प्रोजेक्ट क्या है?

यह प्रोजेक्ट सिर्फ सॉफ्टवेयर नहीं बनाएगा, बल्कि पूरी कंपनियों का डिजिटल सिमुलेशन तैयार करेगा। यानी AI किसी कंपनी के हर विभाग, सप्लाई चेन और फैसलों का मॉडल बनाकर पहले ही उसका नतीजा बता देगा।

मस्क का लक्ष्य है कि AI भविष्य में रॉकेट इंजन जैसे जटिल सिस्टम खुद डिजाइन करे, जिससे इंसानी गलती कम हो और विकास की रफ्तार कई गुना बढ़ जाए।

क्या कोडिंग की जरूरत खत्म हो जाएगी?

मस्क का दावा है कि इस साल के अंत तक पारंपरिक कोडिंग की जरूरत काफी हद तक खत्म हो सकती है। AI सीधे बाइनरी भाषा (0 और 1) में फाइलें तैयार करेगा।

उनका कहना है कि आने वाले महीनों में ‘Grok Code’ दुनिया का सबसे शक्तिशाली कोडिंग मॉडल बन सकता है, जो जटिल सॉफ्टवेयर चुटकियों में तैयार करेगा।

AI से 20 मिनट के वीडियो

xAI की इमेजिन टीम साल के अंत तक ऐसे मॉडल लाने की तैयारी में है, जो एक बार में 10 से 20 मिनट तक के वीडियो स्वतः बना सकेंगे। इसमें इंसानी हस्तक्षेप की जरूरत नहीं होगी।

‘मेम्फिस क्लस्टर’ – धरती का विशाल सुपरकंप्यूटर

मस्क ने बताया कि उनके पास दुनिया का सबसे बड़ा GPU क्लस्टर है, जिसे ‘मेम्फिस क्लस्टर’ कहा जा रहा है। यह 24 घंटे काम करता है और अगले जेनरेशन के AI मॉडल्स को ट्रेनिंग देता है।

यह डेटा सेंटर 1 गीगावाट से ज्यादा बिजली खर्च करेगा और हजारों सिस्टम मिलकर एक विशाल डिजिटल दिमाग की तरह काम कर रहे हैं।

‘एवरीथिंग ऐप’ का सपना

मस्क की ग्रोक वॉइस टीम का लक्ष्य सिर्फ चैटबॉट बनाना नहीं है। वे इसे एक ‘एवरीथिंग ऐप’ में बदलना चाहते हैं — जहां यूजर सवाल-जवाब, वॉइस कमांड, वीडियो जेनरेशन और अन्य सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर पा सकें।

कुल मिलाकर, मस्क का यह विजन AI को धरती से चांद और आगे अंतरिक्ष तक ले जाने का है। हालांकि, इन योजनाओं के व्यावहारिक और वैज्ञानिक पहलुओं पर विशेषज्ञों की अलग-अलग राय है, लेकिन इतना तय है कि टेक दुनिया में AI की रफ्तार अब और तेज होने वाली है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *