देश की सुरक्षा क्षमता को नई ऊंचाई देने की दिशा में बड़ा फैसला लेते हुए Defence Acquisition Council (डीएसी) ने 114 राफेल लड़ाकू विमानों और 6 P-8I समुद्री निगरानी विमानों की खरीद को मंजूरी दे दी है। करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की इस प्रस्तावित डील को भारत की सबसे बड़ी रक्षा खरीद योजनाओं में गिना जा रहा है।
इस फैसले से भारतीय वायुसेना और नौसेना दोनों की सामरिक ताकत में बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है। अब प्रस्ताव अंतिम स्वीकृति के लिए कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के पास भेजा जाएगा।
वायुसेना को मिलेंगे 6-7 नए स्क्वाड्रन
114 नए Dassault Rafale विमानों के शामिल होने से भारतीय वायुसेना को 6 से 7 नए स्क्वाड्रन मिल सकते हैं। फिलहाल वायुसेना के पास करीब 30 स्क्वाड्रन हैं, जबकि रणनीतिक जरूरतों के हिसाब से 42 स्क्वाड्रन की आवश्यकता मानी जाती है।
राफेल 4.5 जेनरेशन का मल्टीरोल फाइटर जेट है, जो एयर-टू-एयर, एयर-टू-ग्राउंड और लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता से लैस है। इससे सीमावर्ती इलाकों में त्वरित प्रतिक्रिया और लंबी दूरी तक मारक क्षमता मजबूत होगी।
नौसेना की समुद्री निगरानी में मजबूती
डीएसी ने भारतीय नौसेना के लिए 6 अतिरिक्त Boeing P-8I Poseidon विमानों की खरीद को भी हरी झंडी दी है। नौसेना पहले से 12 P-8I विमानों का संचालन कर रही है।
ये विमान हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री निगरानी, पनडुब्बी रोधी अभियान और लंबी दूरी की टोही क्षमता के लिए बेहद अहम माने जाते हैं। नए विमानों के जुड़ने से भारत की समुद्री सुरक्षा और मजबूत होगी, खासकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में।
सामरिक और औद्योगिक महत्व
इस मेगा डील का एक अहम पहलू ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता भी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक बड़ी संख्या में विमानों का निर्माण या असेंबली भारत में ही किए जाने की संभावना है, जिससे घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
आगे क्या?
डीएसी की मंजूरी के बाद अब यह प्रस्ताव अंतिम निर्णय के लिए सीसीएस के पास जाएगा। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद कीमत, तकनीकी ट्रांसफर और उत्पादन शर्तों पर विस्तृत बातचीत होगी।
अगर यह डील तय समय पर पूरी होती है तो आने वाले वर्षों में भारतीय वायुसेना और नौसेना दोनों की मारक और निगरानी क्षमता में ऐतिहासिक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।