“परीक्षा बोझ नहीं, सीखने का अवसर है” — सूरजपुर में CBSE सिटी कोऑर्डिनेटर की अहम सलाह

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छत्तीसगढ़ के सूरजपुर में परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सकारात्मक संदेश देते हुए Prabhakar Upadhyay ने कहा कि परीक्षा को बोझ नहीं, बल्कि सीखने और आत्ममूल्यांकन का अवसर मानना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंक ही सफलता का अंतिम पैमाना नहीं हैं, बल्कि कौशल विकास और सकारात्मक वातावरण ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।

परीक्षा तनाव नहीं, आत्मविश्वास का चरण

प्राभाकर उपाध्याय ने कहा कि आज विद्यार्थी ही नहीं, अभिभावक और शिक्षक भी परीक्षा को लेकर अत्यधिक दबाव महसूस करते हैं। अक्सर परिणाम और प्रतिशत को ही सफलता का पैमाना बना दिया जाता है। जबकि परीक्षा केवल ज्ञान और समझ का मूल्यांकन करने का माध्यम है, जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं।

कौशल विकास ही भविष्य की असली ताकत

उन्होंने जोर देकर कहा कि अच्छे अंक जरूरी हैं, लेकिन वे सफलता की गारंटी नहीं हैं। संचार कौशल, समस्या समाधान क्षमता, रचनात्मक सोच, नेतृत्व, टीमवर्क और तकनीकी दक्षता जैसे जीवन कौशल भविष्य की चुनौतियों के लिए ज्यादा जरूरी हैं।

Central Board of Secondary Education और नई शिक्षा नीति भी अब अनुभवात्मक और प्रोजेक्ट आधारित शिक्षा पर ध्यान दे रही है, जिससे विद्यार्थियों में व्यावहारिक समझ विकसित हो।

तुलना से बढ़ता है दबाव

उपाध्याय ने अभिभावकों से विशेष अपील की कि वे बच्चों की तुलना दूसरों से न करें। तुलना आत्मविश्वास को कमजोर करती है और मानसिक दबाव बढ़ाती है। उन्होंने कहा कि बच्चों की मेहनत की सराहना, प्रोत्साहन और सकारात्मक माहौल देना ज्यादा जरूरी है।

समग्र विकास पर ध्यान दें विद्यालय

विद्यालयों को केवल परीक्षा परिणाम पर फोकस नहीं करना चाहिए। योग, खेल, ध्यान और सह-पाठयक्रम गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों के मानसिक संतुलन और एकाग्रता को मजबूत किया जा सकता है।

डिजिटल युग में मोबाइल और सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग भी एकाग्रता को प्रभावित करता है। परीक्षा के दौरान इनका सीमित और उद्देश्यपूर्ण उपयोग जरूरी है। संतुलित दिनचर्या — पर्याप्त नींद, पौष्टिक आहार, नियमित अध्ययन और छोटे-छोटे ब्रेक — तनाव कम करने में मदद करते हैं।

नई मूल्यांकन प्रणाली का उद्देश्य

नई शिक्षा नीति और CBSE की मूल्यांकन प्रणाली अब रटने की प्रवृत्ति से आगे बढ़कर विश्लेषण, समझ और रचनात्मकता पर जोर दे रही है। विद्यार्थियों को अंकों के बजाय विषय को समझने और जीवन में उसके उपयोग पर ध्यान देना चाहिए।

समन्वय से ही सफलता

उपाध्याय ने अंत में कहा कि अभिभावक, शिक्षक और विद्यालय मिलकर सकारात्मक माहौल तैयार करें। जब बच्चे परीक्षा को डर के बजाय आत्मविकास का अवसर समझेंगे, तभी वे मानसिक रूप से मजबूत और आत्मविश्वासी बन सकेंगे।

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