वित्त वर्ष 2026–27 के बजट प्रस्तुतिकरण के दौरान दिल्ली नगर निगम के सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला। सत्ता पक्ष की ओर से “हर-हर महादेव”, “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” जैसे नारे लगाए गए, जिस पर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया। शोर-शराबे के बीच नेता सदन प्रवेश वाही ने बजट भाषण जारी रखा, हालांकि कई बार व्यवधान के कारण कार्यवाही प्रभावित हुई।
नेता सदन प्रवेश वाही ने घोषणा की कि वर्ष 2000 से 2002 के बीच नियुक्त 500 सफाई कर्मियों को नियमित किया जाएगा। इसे लंबे समय से लंबित मांगों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया। जनसुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रत्येक वार्ड में शौचालयों की स्वच्छता, ड्रेन और कल्वर्ट के रखरखाव हेतु पांच-पांच लाख रुपये का अलग प्रावधान रखा गया है। उन्होंने कहा कि यह बजट पिछले वर्ष की तुलना में लगभग ढाई करोड़ रुपये अधिक है।
सफाई व्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने स्वच्छता अभियान के लिए 500 करोड़ रुपये का फंड उपलब्ध कराया है। इस राशि से पूरे शहर में सफाई ढांचे को आधुनिक बनाने की योजना है। नगर निगम ने 14 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों का ऑर्डर दिया है, साथ ही 17 वैक्यूम लोडर, 2 सुपर सकर मशीन और 10 स्किड स्टीयर लोडर खरीदे गए हैं। जल्द ही 70 अतिरिक्त मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें भी बेड़े में शामिल की जाएंगी। इसके अलावा 1000 लीटर पिकर मशीनें मंगाई जा रही हैं और हर वार्ड में चार-चार पिकर उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि गलियों और दुर्गम स्थानों की भी नियमित सफाई हो सके।
रात्रिकालीन सफाई पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। करीब 550 किलोमीटर सड़कों की रात में सफाई की जा रही है और 318 से अधिक बाजारों में नाइट क्लीनिंग व्यवस्था लागू की गई है। निगम का दावा है कि इन प्रयासों के चलते स्वच्छता रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार हुआ है—जहां दिल्ली पहले 90वें स्थान पर थी, अब 31वें स्थान तक पहुंच गई है। लक्ष्य आने वाले समय में शीर्ष दस स्वच्छ शहरों में शामिल होना है।
हंगामे और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच प्रस्तुत यह बजट साफ संदेश देता है कि आने वाले वित्त वर्ष में नगर निगम का फोकस सफाई तंत्र को सुदृढ़ करने, कर्मचारियों की स्थिति सुधारने और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर रहेगा।