तेज रफ्तार जीवनशैली, तनाव और अनियमित खानपान के दौर में दिल की सेहत सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है। ऐसे में लोग प्राकृतिक उपायों की ओर रुख कर रहे हैं। आयुर्वेद में सदियों से इस्तेमाल हो रही अर्जुन की छाल को हृदय के लिए बेहद लाभकारी माना गया है। इसे प्राकृतिक ‘हार्ट टॉनिक’ भी कहा जाता है।
अर्जुन (वैज्ञानिक नाम: Terminalia arjuna) की छाल में शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स और कार्डियो-प्रोटेक्टिव गुण पाए जाते हैं। ये तत्व हृदय की मांसपेशियों को मजबूत करने और रक्त संचार को बेहतर बनाने में सहायक माने जाते हैं।
दिल को मिल सकती है मजबूती
नियमित और संतुलित मात्रा में सेवन से हृदय की कार्यक्षमता बेहतर हो सकती है। यह दिल की मांसपेशियों को ताकत देने में मदद करता है और कुछ अध्ययनों के अनुसार हृदय संबंधी जोखिम कम करने में सहायक हो सकता है।
ब्लड प्रेशर नियंत्रण में सहायक
अर्जुन की छाल को प्राकृतिक रूप से ब्लड प्रेशर संतुलित रखने में मददगार माना जाता है। हालांकि हाई बीपी के मरीजों को इसे अपनाने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
कोलेस्ट्रॉल पर सकारात्मक प्रभाव
यह खराब (LDL) कोलेस्ट्रॉल को कम करने और अच्छे (HDL) कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद कर सकती है। इससे धमनियों में रुकावट का खतरा घट सकता है।
एंटीऑक्सीडेंट सुरक्षा
अर्जुन छाल में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर में फ्री रेडिकल्स से लड़ने में मदद करते हैं। इससे हृदय ही नहीं, शरीर की अन्य कोशिकाओं को भी सुरक्षा मिलती है।
तनाव में राहत
तनाव हृदय रोगों का बड़ा कारण है। अर्जुन छाल का नियमित सेवन मानसिक शांति और स्थिरता प्रदान करने में सहायक माना जाता है, जिससे हार्ट हेल्थ बेहतर हो सकती है।
सेवन कैसे करें?
अर्जुन की छाल पाउडर, काढ़ा या कैप्सूल के रूप में ली जा सकती है।
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काढ़ा: एक कप पानी में एक चम्मच अर्जुन छाल पाउडर डालकर 5–7 मिनट उबालें, फिर छानकर गुनगुना पिएं।
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दूध के साथ: कुछ लोग इसे दूध में उबालकर भी लेते हैं।
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कैप्सूल/सप्लीमेंट: डॉक्टर की सलाह से ही लें।
नोट: किसी भी आयुर्वेदिक या हर्बल उपाय को शुरू करने से पहले चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है, विशेषकर यदि आप पहले से हृदय, बीपी या अन्य दवाइयां ले रहे हों।
अर्जुन की छाल एक पारंपरिक औषधीय विकल्प है, जो संतुलित जीवनशैली और चिकित्सकीय सलाह के साथ मिलकर हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है।