AI समिट 2026: डीपफेक पर सख्ती का संकेत, ‘ऑथेंटिसिटी लेबल’ की पैरवी; 10 लाख करोड़ निवेश का ऐलान

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दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ के चौथे दिन प्रधानमंत्री Narendra Modi ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग पर स्पष्ट दिशा दी। उन्होंने कहा कि जैसे खाद्य उत्पादों पर ‘न्यूट्रिशन लेबल’ होता है, वैसे ही डिजिटल कंटेंट पर ‘ऑथेंटिसिटी लेबल’ अनिवार्य होना चाहिए, ताकि आम नागरिक यह पहचान सकें कि कौन-सा कंटेंट वास्तविक है और कौन-सा एआई-जनित। प्रधानमंत्री ने संकेत दिया कि डीपफेक जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है।

समिट, जो 16 से 20 फरवरी तक चल रही है, में 110 से अधिक देशों की भागीदारी बताई गई है। मंच से प्रधानमंत्री ने एआई को भय नहीं, बल्कि ‘भाग्य’ और भविष्य का अवसर बताया। उन्होंने ‘M.A.N.A.V’ विजन का प्रस्ताव रखते हुए कहा कि एआई नैतिक (Moral), जवाबदेह (Accountable), राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान करने वाला (National Sovereignty), सुलभ (Accessible) और वैध (Valid) होना चाहिए। उनके अनुसार, एआई को ओपन और सहयोगात्मक बनाकर ही वैश्विक स्तर पर सुरक्षित और मानवीय उपयोग सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने स्किलिंग और रिस्किलिंग को बड़े जन-आंदोलन का रूप देने पर भी जोर दिया, यह कहते हुए कि इंसान और मशीन मिलकर नए अवसर रचेंगे।

उद्योग जगत की ओर से Mukesh Ambani ने बड़ा निवेश रोडमैप पेश किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह डेटा को सुलभ बनाया गया, उसी तरह एआई को भी आम भारतीय तक किफायती दरों पर पहुंचाया जाएगा। इस दिशा में रिलायंस समूह अगले सात वर्षों में 10 लाख करोड़ रुपये निवेश करेगा। अंबानी ने एआई को उत्पादकता बढ़ाने वाला ‘मंत्र’ बताते हुए कहा कि यह नौकरियां खत्म करने के बजाय उच्च-कौशल वाले नए अवसर पैदा करेगा।

तकनीकी साझेदारियों की बात करें तो Tata Group ने अगली पीढ़ी के ‘एआई-ऑप्टिमाइज्ड’ डेटा सेंटर के निर्माण की घोषणा की। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने बताया कि 100 मेगावाट क्षमता से शुरुआत कर इसे आगे चलकर एक गीगावाट तक विस्तारित करने की योजना है, और इस परियोजना में OpenAI के साथ साझेदारी की गई है।

वैश्विक टेक नेतृत्व की उपस्थिति भी चर्चा में रही। Sundar Pichai ने भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के तहत ‘फुल स्टैक एआई हब’ स्थापित करने की दिशा में कदमों का जिक्र किया, जिसमें बड़े पैमाने की कंप्यूटिंग क्षमता और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी शामिल होगी। वहीं Sam Altman की मौजूदगी ने एआई इकोसिस्टम में वैश्विक सहयोग के संकेत दिए।

समिट के दौरान एक प्रतीकात्मक दृश्य भी चर्चा में रहा—प्रधानमंत्री के सामने रखी नेमप्लेट पर ‘भारत’ लिखा हुआ दिखाई दिया। इससे पहले 2024 के जी-20 शिखर सम्मेलन में भी यही संदेश देखने को मिला था, जिसने नाम-प्रयोग को लेकर व्यापक विमर्श छेड़ा था।

कुल मिलाकर, समिट ने दो समानांतर संदेश दिए—एक ओर डीपफेक और भ्रामक कंटेंट पर सख्ती व पारदर्शिता की जरूरत, दूसरी ओर एआई को किफायती, सुलभ और रोजगार-सृजनकारी बनाने के लिए बड़े निवेश और बुनियादी ढांचे का विस्तार। अब नजर इस बात पर होगी कि ‘ऑथेंटिसिटी लेबल’ जैसे सुझावों को नीति और नियमन में किस रूप में ढाला जाता है।

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