‘दो दीवाने शहर में’ से पहले मृणाल–सिद्धांत की खुली बातचीत: रुकना भी ज़रूरी, सच से भागना नहीं

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रोमांटिक ड्रामा Do Deewane Shehar Mein 20 फरवरी 2026 को रिलीज़ हो रही है। फिल्म में रोशनी और शशांक की कहानी के ज़रिये रिश्तों, रफ़्तार और आत्म-स्वीकार का सवाल उठाया गया है। रिलीज़ से ठीक पहले Mrunal Thakur और Siddhant Chaturvedi ने ज़िंदगी, जजमेंट और अपने निजी संघर्षों पर बेबाकी से बात की।

मृणाल मानती हैं कि ब्रेकअप का दौर उनके लिए ठहरकर खुद को देखने का समय था। वे कहती हैं कि असुरक्षाएं और डर हर किसी के भीतर होते हैं, फर्क बस इतना है कि आप उन्हें बोझ बनाते हैं या ताकत। उनके लिए वही कमज़ोरियां आगे चलकर आत्मविश्वास का आधार बन गईं। भाषा और एक्सेंट को लेकर रही झिझक भी अब गर्व में बदल चुकी है—मराठी बोलते हुए मिलने वाला स्नेह उन्हें याद दिलाता है कि अपनी जड़ों से जुड़ना ही सबसे बड़ी ताकत है।

फिल्म ने उन्हें धीमे चलने का सबक दिया। आज की भागदौड़ में, जहां सुबह का अहसास भी मोबाइल की स्क्रीन के पीछे खो जाता है, मृणाल का मानना है कि कभी-कभी रुकना ज़रूरी है—अपने भीतर झांकने, अपनी सीमाओं और खूबियों को स्वीकारने और अपने लोगों को समय देने के लिए। उनके लिए यह कहानी सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि आत्म-खोज की यात्रा बन गई।

सिद्धांत कहते हैं कि कैमरे के सामने झूठ टिकता नहीं। निजी संघर्षों का असर उन्होंने अभिनय में सचाई के साथ उतारा। उनके मुताबिक, दर्द हो या उलझन—अगर उसे ईमानदारी से बरता जाए तो वही भाव दर्शकों तक सजीव होकर पहुंचता है। वे ऐसे किरदार चुनना पसंद करते हैं जो उनसे अलग हों, क्योंकि दूसरों की दुनिया को समझना ही उनकी जिज्ञासा का केंद्र है।

इंडस्ट्री में भाषा, पहनावे और पहचान पर होने वाले जजमेंट पर सिद्धांत का नजरिया साफ है—पहचान काम से बनती है, ब्रांड से नहीं। वे अपनी जड़ों और मातृभाषा पर गर्व करने की बात करते हैं। सोशल मीडिया की अफवाहों पर मृणाल का रुख भी स्पष्ट है—जरूरत पड़ी तो वे खुद बोलेंगी, वरना शोर से दूरी बेहतर है।

फिल्म का एक संवाद—कुछ रिश्तों को फुल स्टॉप देना चाहिए—दोनों के विचारों का सार समेटता है। मृणाल कहती हैं, जब चीजें बहुत बिगड़ जाएं तो पूर्ण विराम जरूरी है; लेकिन अगर संवाद और समझ से रास्ता निकल सकता हो, तो कॉमा लगाइए, प्यार को एक मौका दीजिए। यही संतुलन शायद ‘दो दीवाने शहर में’ की असली धड़कन है—रुककर सोचने का साहस और आगे बढ़ने की उम्मीद।

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