विकसित छत्तीसगढ़ की ओर निर्णायक कदम, सीएम साय ने बजट को बताया सुशासन से समृद्धि का रोडमैप

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रायपुर में आज का दिन केवल एक औपचारिक वित्तीय प्रक्रिया का दिन नहीं है, बल्कि आने वाले वर्षों की दिशा तय करने वाला क्षण माना जा रहा है। बजट पेश होने से पहले मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किया गया संदेश साफ संकेत देता है कि सरकार इस बजट को एक साधारण वार्षिक दस्तावेज नहीं, बल्कि विकसित छत्तीसगढ़ की आधारशिला के रूप में प्रस्तुत कर रही है। मुख्यमंत्री ने इसे अपने कार्यकाल का तीसरा और अब तक का सबसे महत्वपूर्ण बजट बताते हुए स्पष्ट किया कि यह केवल आंकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि भविष्य की ठोस रूपरेखा है।

अपने संदेश में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार उसी दृष्टि को केंद्र में रखकर आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार यह बजट ‘सुशासन से समृद्धि’ के मॉडल को मजबूती देगा और किसानों, युवाओं, मातृशक्ति, गरीबों तथा आदिवासी समाज को सशक्त बनाने की दिशा में ठोस प्रावधान लेकर आएगा। उनके शब्दों में यह वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ के नए दौर की शुरुआत का संकेत है।

नए विधानसभा भवन में दोपहर 12:30 बजे वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा प्रस्तुत किया जाने वाला यह बजट कई मायनों में विशेष माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि इसे नीति आधारित, व्यापक और विजन 2047 के अनुरूप तैयार किया गया है। संकेत मिल रहे हैं कि ग्रामीण विकास, शहरी आधारभूत संरचना, कृषि सुधार, रोजगार सृजन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े बड़े प्रावधान इसमें शामिल हो सकते हैं।

बजट से ठीक पहले सामने आई एक और अहम जानकारी ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। राज्य सरकार दिल्ली, कर्नाटक और तमिलनाडु की तर्ज पर जल बोर्ड के गठन की दिशा में आगे बढ़ रही है। नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा तैयार मसौदा वित्त विभाग को भेजा जा चुका है और संभावना है कि बजट में इसकी औपचारिक घोषणा की जाए। प्रस्तावित जल बोर्ड की प्राथमिक जिम्मेदारी शहरों में घर-घर शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करना, सीवरेज प्रबंधन को व्यवस्थित करना और शहरी जल संरचना को आधुनिक स्वरूप देना होगा। शुरुआती चरण में 14 नगर निगम क्षेत्रों से इसकी शुरुआत किए जाने की बात सामने आई है, जिसके बाद बड़े नगर पालिकाओं को भी इसमें जोड़ा जाएगा।

सरकार के भीतर इसे शहरी ढांचे में एक बड़े सुधार के रूप में देखा जा रहा है। यदि जल बोर्ड की घोषणा होती है तो यह आने वाले वर्षों में शहरी प्रशासन की कार्यप्रणाली में बदलाव का आधार बन सकता है। विजन 2047 के अनुरूप जल संसाधनों के प्रबंधन को संस्थागत स्वरूप देना राज्य की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री के संदेश और बजट से पहले उभर रहे संकेत यह दर्शाते हैं कि सरकार इस बार समग्र विकास की व्यापक तस्वीर पेश करना चाहती है। ग्रामीण और शहरी संतुलन, कृषि और उद्योग के बीच तालमेल, सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के विस्तार—इन सभी को एक साथ साधने का प्रयास दिखाई दे रहा है।

आज पेश होने वाला बजट केवल वित्तीय वर्ष की रूपरेखा नहीं, बल्कि आने वाले दशकों की विकास यात्रा का संकेतक साबित हो सकता है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि घोषणाएं कितनी ठोस होती हैं और उनका क्रियान्वयन किस गति से होता है।

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