यूरेनियम डील से खालिस्तानी मुद्दे तक—भारत-कनाडा संबंधों को रीसेट करने की पहल

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच सोमवार सुबह नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में अहम मुलाकात हुई। इस बैठक को दोनों देशों के रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। थोड़ी ही देर में द्विपक्षीय वार्ता शुरू हुई, जिसमें ऊर्जा सहयोग, निवेश, व्यापार विस्तार और व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) जैसे मुद्दों पर चर्चा तय है।

कार्नी के इस दौरे का प्रमुख उद्देश्य भारत-कनाडा के बीच प्रस्तावित 10 साल के यूरेनियम सप्लाई समझौते को अंतिम रूप देना बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार यह डील करीब 3 अरब डॉलर की हो सकती है। कनाडा दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा यूरेनियम उत्पादक देश है, और भारत अपने बढ़ते परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना चाहता है। दोनों देशों के बीच न्यूक्लियर कोऑपरेशन एग्रीमेंट 2013 से लागू है, जिसके तहत पहले भी यूरेनियम सप्लाई हो चुकी है।

बैठक के दौरान ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने पर भी जोर रहा। वर्तमान में भारत और कनाडा के बीच वार्षिक व्यापार 21 अरब डॉलर से अधिक है। भारत में 600 से ज्यादा कनाडाई कंपनियां सक्रिय हैं, जबकि कनाडा के बड़े पेंशन फंड भारत के रियल एस्टेट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में भारी निवेश कर चुके हैं। अनुमान है कि कनाडाई निवेश भारत में 100 अरब डॉलर से ज्यादा पहुंच चुका है। अब दोनों पक्ष इस निवेश को और विस्तार देना चाहते हैं।

हालांकि यह मुलाकात केवल आर्थिक एजेंडे तक सीमित नहीं रही। खालिस्तानी चरमपंथ और सुरक्षा सहयोग का मुद्दा भी चर्चा में अहम रहा। 2023 में सिख अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद दोनों देशों के संबंधों में गंभीर तनाव आ गया था। उस समय कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने संसद में भारत पर आरोप लगाए थे, जिन्हें भारत ने सख्ती से खारिज किया था। इसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित किया और वीजा सेवाएं भी प्रभावित हुईं। CEPA जैसी अहम वार्ताएं ठप पड़ गईं।

मार्क कार्नी के मार्च 2025 में प्रधानमंत्री बनने के बाद रिश्तों में सुधार की कोशिशें तेज हुई हैं। कार्नी ने कहा है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद कनाडा भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का भरोसेमंद साझेदार बना रहना चाहता है।

कनाडा की सामाजिक संरचना भी इस रिश्ते में अहम भूमिका निभाती है। 2021 की जनगणना के अनुसार, वहां लगभग 23% आबादी विदेश में जन्मी है। भारतीय मूल के करीब 16 लाख लोग कनाडा में रहते हैं, जो दोनों देशों के बीच मजबूत सामाजिक और सांस्कृतिक पुल का काम करते हैं।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या यह मुलाकात भारत-कनाडा संबंधों में नई शुरुआत साबित होगी। यदि यूरेनियम समझौता और CEPA वार्ता आगे बढ़ती है, तो यह न केवल आर्थिक बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी दोनों देशों के लिए बड़ा कदम होगा।

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