सूरजपुर में समय पर नहीं खुला स्कूल, बाहर बैठे पढ़ते मिले बच्चे; वीडियो वायरल होते ही प्रधान पाठक निलंबित

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छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में शिक्षा व्यवस्था की गंभीर लापरवाही का एक मामला सामने आया है, जिसने पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया। भैयाथान विकासखंड के सांवारावां स्थित शासकीय प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय निर्धारित समय पर नहीं खुला, जिसके कारण मासूम छात्र-छात्राओं को स्कूल गेट के बाहर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ी। इस पूरी घटना का वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया और तत्काल जांच के बाद विद्यालय के प्रधान पाठक के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया।

मिली जानकारी के अनुसार 5 मार्च 2026 को सुबह स्कूल का समय हो जाने के बावजूद सांवारावां स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय का मुख्य द्वार बंद मिला। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय सूरजपुर की रिपोर्ट के मुताबिक दोपहर लगभग 12 बजे तक स्कूल में ताला लटका हुआ था। हैरानी की बात यह रही कि इस दौरान कई छात्र-छात्राएं स्कूल परिसर के बाहर बैठे रहे और पढ़ाई करने की कोशिश करते नजर आए। विद्यालय बंद होने के कारण बच्चों को उस दिन मध्यान्ह भोजन भी नहीं मिल सका, जिससे अभिभावकों और ग्रामीणों में नाराजगी फैल गई।

घटना का वीडियो सामने आने के बाद यह मामला तेजी से फैल गया। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा था कि बच्चे स्कूल के गेट के बाहर बैठे हैं और अंदर जाने के लिए दरवाजा बंद है। जैसे ही यह वीडियो सामने आया, शिक्षा विभाग ने तत्काल मामले की जांच करवाई। प्रारंभिक जांच में ही विद्यालय प्रबंधन की गंभीर लापरवाही सामने आ गई, जिसके बाद विभाग ने कड़ी कार्रवाई का फैसला लिया।

जांच में पता चला कि विद्यालय के प्रधान पाठक संजय कुमार गुप्ता बिना सक्षम अधिकारी से अवकाश स्वीकृत कराए ही अनुपस्थित थे। इतना ही नहीं, निर्धारित समय पर विद्यालय में कोई भी शिक्षक मौजूद नहीं था। इसे शिक्षा व्यवस्था के प्रति गंभीर लापरवाही और अनुशासनहीनता माना गया। इसके बाद संभागीय संयुक्त संचालक शिक्षा विभाग ने कार्रवाई करते हुए संजय कुमार गुप्ता को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 9(1)(क) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

निलंबन आदेश के अनुसार संजय कुमार गुप्ता का मुख्यालय अब विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय ओड़गी, जिला सूरजपुर निर्धारित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमों के अनुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों की लापरवाही को किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए शिक्षा विभाग ने केवल प्रधान पाठक पर ही कार्रवाई नहीं की बल्कि संबंधित संकुल समन्वयक और विद्यालय के अन्य शिक्षकों को भी नोटिस जारी किया है। उनसे इस घटना को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई और सुविधाओं से जुड़ी जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण होती है और यदि इसमें किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल बंद होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई और मध्यान्ह भोजन भी नहीं मिला, जिससे अभिभावकों में आक्रोश है। वहीं शिक्षा विभाग ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा सामने न आएं, इसके लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।

यह घटना एक बार फिर सरकारी स्कूलों की व्यवस्था और शिक्षकों की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े करती है। हालांकि विभाग की त्वरित कार्रवाई से यह संदेश जरूर गया है कि बच्चों की शिक्षा से जुड़े मामलों में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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