छत्तीसगढ़ के महासमुंद में पुलिस ने एक बड़े अवैध मिनरल नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसमें 106 करोड़ रुपये से ज्यादा के कारोबार का खुलासा हुआ है। यह पूरा खेल हाईवे से स्पंज आयरन की चोरी, फर्जी बिलिंग और कंपनियों तक उसकी सप्लाई के जरिए चलाया जा रहा था।
पुलिस जांच में सामने आया कि इस संगठित रैकेट के जरिए ट्रकों से आयरन चोरी कर उसे वैध दिखाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाते थे। इसके बाद उसी माल को अलग-अलग कंपनियों में खपाया जाता था, जिससे यह पूरा अवैध कारोबार लंबे समय से बिना किसी शक के चलता रहा।
इस मामले में पुलिस ने मास्टरमाइंड समेत 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें रायगढ़ की एक इस्पात कंपनी के संचालक तारक घोष और रंजीत सिंह भी शामिल हैं, जिनकी भूमिका इस पूरे नेटवर्क में अहम बताई जा रही है।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि इस गिरोह ने अपने काम को छिपाने के लिए बेहद सुनियोजित तरीका अपनाया था। तीन मजदूरों के नाम पर शेल कंपनियां बनाई गईं, जिनके जरिए फर्जी इनवॉइस तैयार किए जाते थे। इन बिलों में बड़े उद्योगों के नाम दिखाए जाते थे, जबकि असल में माल चोरी का होता था।
चोरी किए गए स्पंज आयरन को अवैध रूप से स्टोर कर हाईवे के रास्ते अलग-अलग जगहों तक पहुंचाया जाता था। इसके बाद बिचौलियों के माध्यम से कंपनियों को सप्लाई कर दिया जाता था। इस पूरे नेटवर्क में करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ, जो अब जांच एजेंसियों के रडार पर है।
पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया है और जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इस घोटाले में अभी और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं, क्योंकि कई कंपनियों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है।
महासमुंद पुलिस की इस कार्रवाई ने न सिर्फ एक बड़े आर्थिक अपराध का खुलासा किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि किस तरह संगठित तरीके से खनिज संसाधनों की चोरी कर सरकारी व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया जा रहा था।