देशभर में एलपीजी सिलेंडर बुकिंग को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच सरकार ने साफ कर दिया है कि नियमों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने उन सभी खबरों को गलत बताया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि अब गैस सिलेंडर बुकिंग के लिए 35 या 45 दिन का इंतजार करना होगा।
सरकार के मुताबिक, मौजूदा नियम पहले की तरह ही जारी रहेंगे। यानी एक बार सिलेंडर की डिलीवरी होने के बाद उपभोक्ता 25 दिन के भीतर दूसरा सिलेंडर बुक नहीं कर सकते, लेकिन 25 दिन पूरे होते ही बुकिंग की जा सकती है। इससे ज्यादा किसी तरह की बाध्यता या बदलाव नहीं किया गया है।
हालांकि, बाजार में एक अलग स्थिति जरूर देखने को मिल रही है। घरेलू गैस सिलेंडर के मुकाबले 19 किलो वाले कॉमर्शियल सिलेंडर की मांग ज्यादा बढ़ गई है, जिससे सप्लाई पर दबाव बना हुआ है। इसी को देखते हुए सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए कॉमर्शियल एलपीजी के कोटे में 20% की अतिरिक्त बढ़ोतरी की मंजूरी दी है। इसके बाद कुल आवंटन 50% तक पहुंच गया है, हालांकि इसका असर जमीन पर दिखने में कुछ समय लग सकता है।
इसी के साथ सरकार ने पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG को लेकर भी बड़ा कदम उठाया है। ‘अनिवार्य वस्तु अधिनियम’ के तहत जारी नए आदेश का उद्देश्य देशभर में गैस पाइपलाइन नेटवर्क को तेजी से फैलाना है। अब सोसाइटी या RWA की वजह से पाइपलाइन का काम नहीं रुकेगा। उन्हें तीन दिन के भीतर अनुमति देनी होगी, वरना कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
सरकारी विभागों के लिए भी सख्त समय सीमा तय कर दी गई है। छोटे प्रोजेक्ट्स को 10 दिन और बड़े प्रोजेक्ट्स को 60 दिन के भीतर मंजूरी देना अनिवार्य होगा। अगर तय समय में फैसला नहीं होता, तो इसे स्वतः मंजूरी माना जाएगा। इससे गैस इंफ्रास्ट्रक्चर का काम तेज होगा और ज्यादा लोगों तक पाइप गैस पहुंच सकेगी।
एक और अहम बदलाव यह है कि जिन घरों में PNG कनेक्शन उपलब्ध होगा, वहां एलपीजी सिलेंडर का इस्तेमाल धीरे-धीरे बंद किया जाएगा। ऐसे उपभोक्ताओं को भविष्य में नया एलपीजी कनेक्शन नहीं मिलेगा और पुराने कनेक्शन को भी सरेंडर करना होगा, हालांकि यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से लागू होगी।
सरकार का कहना है कि ये सभी कदम गैस सप्लाई को बेहतर बनाने, सिस्टम को पारदर्शी करने और भविष्य में किसी भी तरह की कमी से बचने के लिए उठाए जा रहे हैं। कुल मिलाकर, जहां एक तरफ बुकिंग नियमों को लेकर फैली अफवाहों पर विराम लगा है, वहीं दूसरी तरफ गैस वितरण व्यवस्था को आधुनिक और व्यवस्थित बनाने की दिशा में तेजी से काम जारी है।