स्टील मेल्टिंग शॉप-3 (एसएमएस-3) में इन-हाउस नवाचार के माध्यम से दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं, आरएच डिगैसर के प्रोपेन से कोक ओवन गैस (सीओजी) में रूपांतरण तथा अतिरिक्त लैडल बेली स्टैंड के निर्माण को सफलतापूर्वक पूर्ण कर संचालनिक दक्षता और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक उल्लेखनीय उपलब्धि प्राप्त की गई है।
उल्लेखनीय है कि दोनों कार्य मात्र पंद्रह दिनों की अल्प अवधि में पूर्ण किए गए। इन परियोजनाओं का उद्घाटन कार्यपालक निदेशक (वर्क्स) श्री राकेश कुमार द्वारा वरिष्ठ प्रबंधन की उपस्थिति में किया गया। इस अवसर पर मुख्य महाप्रबंधक (एम एंड यू) श्री बी. के. बेहरा, मुख्य महाप्रबंधक (मैकेनिकल) श्री पी. के. सिंह तथा मुख्य महाप्रबंधक (एसएमएस-3) श्री त्रिभुवन बैठा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। साथ ही इस कार्यक्रम में महाप्रबंधक (मेंटेनेंस) श्री प्रद्युम्न सतपथी, महाप्रबंधक (ऑपरेशन) श्री डी. विजित, महाप्रबंधक (ऑपरेशन) श्री प्रमोद अग्रवाल, महाप्रबंधक (ट्रेनिंग) श्री उमाशंकर परगनिहा एवं महाप्रबंधक (टीए टू सीजीएम) श्री दिलीप वार्ष्णेय भी उपस्थित रहे।
एसएमएस-3 का आरएच डिगैसर, जो तरल इस्पात के वैक्यूम डिगैसिंग के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण यूनिट है और भारतीय रेलवे हेतु ब्लूम एवं रेल उत्पादन की कड़ी गुणवत्ता आवश्यकताओं को पूरा करता है, पूर्व में वेसल प्रीहीटिंग के लिए प्रोपेन गैस पर आधारित था। हाल के ईंधन संकट एवं प्रोपेन की सीमित उपलब्धता के कारण इस प्रणाली का निर्बाध संचालन चुनौतीपूर्ण हो गया था।
इस चुनौती का समाधान खोजते हुए टीम एसएमएस-3 ने पूर्णतः इन-हाउस इंजीनियरिंग एवं निष्पादन के माध्यम से आरएच डिगैसर वेसल प्रीहीटिंग सिस्टम को प्रोपेन से कोक ओवन गैस (सीओजी) में सफलतापूर्वक परिवर्तित किया। यह प्रणाली दिनांक 30 मार्च 2026 को सफलतापूर्वक कमीशन की गई, जिससे न केवल संचालन की निरंतरता सुनिश्चित हुई, बल्कि ईंधन के उपयोग में भी सुलभता प्राप्त हुई।
इसके समानांतर, केवल चार लैडल बेली स्टैंड उपलब्ध होने के कारण उत्पन्न लैडल उपलब्धता की समस्या—जिससे उत्पादन पर दबाव एवं प्रतीक्षा समय में वृद्धि हो रही थी, जिसे दूर करने हेतु टीम ने एक अतिरिक्त लैडल बेली स्टैंड का भी इन-हाउस निर्माण एवं कमीशनिंग की। इस पहल से लैडल हैंडलिंग क्षमता में वृद्धि हुई तथा टर्नअराउंड समय में उल्लेखनीय कमी आई।
इस अवसर पर अपने संबोधन में कार्यपालक निदेशक (वर्क्स) श्री राकेश कुमार ने टीम एसएमएस-3 को इस नवाचारी एवं समयोचित पहल के लिए बधाई दी। उन्होंने इसे संचालनिक सुदृढ़ता, लागत अनुकूलन एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने टीम के सक्रिय दृष्टिकोण की सराहना करते हुए कहा कि आंतरिक विशेषज्ञता के प्रभावी उपयोग से बाहरी चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत कर एक अनुकरणीय उदाहरण स्थापित किया गया है, जो अन्य इकाइयों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा।
आरएच सीओजी कन्वर्जन प्रणाली का डिज़ाइन महाप्रबंधक (मैकेनिकल) श्री अजीत नारायण के नेतृत्व एवं महाप्रबंधक (मैकेनिकल) श्री संजीब मिश्रा के मार्गदर्शन में इन-हाउस विकसित किया गया। इसका सफल निष्पादन सहायक महाप्रबंधक (मैकेनिकल) श्री प्रोनब रॉय एवं वरिष्ठ प्रबंधक (मैकेनिकल) श्री आशुतोष सिंह द्वारा सहयोगी टीम केएमसी के साथ किया गया।
वहीं, अतिरिक्त लैडल बेली स्टैंड का डिज़ाइन उप महाप्रबंधक (मैकेनिकल) श्री राकेश वृष्णवंशी, उप महाप्रबंधक (इलेक्ट्रिकल) श्री रजत सरकार एवं उप महाप्रबंधक (ऑपरेशन) मोहम्मद जावेद अंसारी द्वारा महाप्रबंधक (मैकेनिकल) श्री संजीबा मिश्रा तथा महाप्रबंधक (ऑपरेशन) श्री हिमांशु भूषण मलिक के मार्गदर्शन में तैयार किया गया। इसका निष्पादन वरिष्ठ प्रबंधक (मैकेनिकल) श्री चंदन चतुर्वेदी, वरिष्ठ प्रबंधक (मैकेनिकल) श्री अमृत अशुग पाल एवं प्रबंधक (इलेक्ट्रिकल) श्री अंशु अग्रवाल द्वारा सहयोगी टीम जीआरई के साथ किया गया।
दोनों परियोजनाओं—आरएच सीओजी कन्वर्जन एवं लैडल बेली स्टैंड संवर्धन—का समग्र समन्वय एवं निगरानी महाप्रबंधक (मेंटेनेंस) श्री प्रद्युम्न सतपथी द्वारा की गई। मुख्य महाप्रबंधक (एसएमएस-3) श्री त्रिभुवन बैठा ने परियोजना को रणनीतिक दिशा एवं निरंतर सहयोग प्रदान किया।