दिल से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते खतरे के बीच American Heart Association (AHA) और American College of Cardiology (ACC) ने कोलेस्ट्रॉल को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है, जिसने पुराने मानकों को काफी हद तक बदल दिया है। अब फोकस एक तय “नॉर्मल” नंबर पर नहीं, बल्कि हर व्यक्ति के व्यक्तिगत जोखिम (रिस्क प्रोफाइल) पर रखा गया है।
दुनियाभर में दिल की बीमारियां मौत का सबसे बड़ा कारण बनी हुई हैं। World Heart Federation के अनुसार, हर साल 2 करोड़ से ज्यादा लोगों की जान कार्डियोवस्कुलर डिजीज के कारण जाती है, और इसमें हाई कोलेस्ट्रॉल की बड़ी भूमिका होती है। ऐसे में नई गाइडलाइन को समझना हर व्यक्ति के लिए जरूरी हो गया है।
कोलेस्ट्रॉल दरअसल खून में मौजूद एक तरह का फैट होता है, जो शरीर के लिए जरूरी भी है। यह सेल्स की दीवार बनाने, हार्मोन और विटामिन D बनाने और पाचन में मदद करता है। लेकिन जब इसका असंतुलन होता है, खासकर LDL यानी “बैड कोलेस्ट्रॉल” बढ़ता है, तब यह खतरनाक बन जाता है। इसके उलट HDL यानी “गुड कोलेस्ट्रॉल” शरीर को सुरक्षित रखने में मदद करता है।
नई गाइडलाइन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब एक ही नंबर को “नॉर्मल” नहीं माना जाएगा। जिन लोगों को हार्ट डिजीज का कोई खतरा नहीं है, उनके लिए LDL 100 mg/dL से कम रखना जरूरी बताया गया है। वहीं जिनका रिस्क मध्यम है, उन्हें इसे 70 mg/dL से नीचे रखना होगा, और हाई रिस्क वाले लोगों के लिए यह सीमा 55 mg/dL तक कर दी गई है। यानी अब इलाज और लक्ष्य पूरी तरह व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करेंगे।
एक और बड़ा बदलाव स्क्रीनिंग को लेकर किया गया है। अब सलाह दी गई है कि 20 साल की उम्र से ही नियमित कोलेस्ट्रॉल टेस्ट कराया जाए। वहीं जिन बच्चों में फैमिली हिस्ट्री या जेनेटिक समस्या का खतरा है, उनकी जांच 9 साल की उम्र से शुरू करने की सिफारिश की गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आज के समय में खराब लाइफस्टाइल, जंक फूड, कम फिजिकल एक्टिविटी और बढ़ता तनाव कम उम्र में ही कोलेस्ट्रॉल बढ़ा रहे हैं। यही वजह है कि अब गाइडलाइन में सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल सुधार पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया है।
हाई कोलेस्ट्रॉल का असर सिर्फ दिल तक सीमित नहीं रहता। यह धमनियों में जमा होकर ब्लॉकेज बनाता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है। यही क्लॉट अगर दिमाग तक पहुंच जाए तो स्ट्रोक का कारण बन सकता है, और लंबे समय में किडनी की कार्यक्षमता भी प्रभावित हो सकती है।
अगर किसी की रिपोर्ट में कोलेस्ट्रॉल ज्यादा आता है, तो सबसे पहला कदम डॉक्टर से सलाह लेना है। इसके बाद हेल्दी डाइट, नियमित एक्सरसाइज, वजन नियंत्रण, अच्छी नींद और तनाव प्रबंधन बेहद जरूरी हो जाते हैं। कई मामलों में डॉक्टर दवाओं की भी सलाह दे सकते हैं, खासकर जब रिस्क ज्यादा हो।
कुल मिलाकर, नई गाइडलाइन का संदेश साफ है—अब सभी के लिए एक जैसा नियम नहीं चलेगा। हर व्यक्ति को अपनी उम्र, आदतों और स्वास्थ्य स्थिति के हिसाब से कोलेस्ट्रॉल को समझना और नियंत्रित करना होगा, तभी दिल और शरीर दोनों को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।