गर्मी का मौसम आते ही बाजारों में आम की बहार दिखने लगती है, लेकिन इस बार आम के साथ बड़ा खतरा भी सामने आया है। H-FAST की टीम ने हाल ही में कार्रवाई करते हुए करीब 200 किलो केमिकल से पकाए गए आम जब्त किए हैं। जांच में सामने आया कि इन आमों को खतरनाक केमिकल कैल्शियम कार्बाइड से पकाया गया था, जो सीधे तौर पर सेहत के लिए हानिकारक माना जाता है।
दरअसल, कैल्शियम कार्बाइड एक इंडस्ट्रियल केमिकल है जिसका इस्तेमाल वेल्डिंग जैसे कामों में होता है। जब यह नमी के संपर्क में आता है तो एसीटिलीन गैस छोड़ता है, जो प्राकृतिक रूप से फल पकाने वाली एथिलीन गैस जैसा असर करती है। व्यापारी इसी गैस का फायदा उठाकर कच्चे आम को 1–2 दिन में पका देते हैं, ताकि जल्दी मुनाफा कमा सकें। लेकिन यही शॉर्टकट लोगों की सेहत पर भारी पड़ सकता है।
डॉक्टरों के अनुसार, इस तरह के आम खाने से शरीर में आर्सेनिक और फॉस्फोरस जैसे जहरीले तत्व पहुंच सकते हैं। इसका असर तुरंत भी दिख सकता है और लंबे समय में गंभीर बीमारियों का कारण भी बन सकता है। पेट में जलन, गैस, उल्टी, सिरदर्द जैसी समस्याएं इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं, जबकि लंबे समय तक सेवन करने पर लिवर, किडनी और नर्व सिस्टम को नुकसान पहुंच सकता है। यहां तक कि कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है।
सबसे चिंता की बात यह है कि सिर्फ आम को धोने या छीलने से यह खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता। केमिकल का असर फल के गूदे तक पहुंच जाता है, जिससे टॉक्सिन्स सीधे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। इसलिए बाजार से आम खरीदते समय सतर्क रहना बेहद जरूरी है।
अगर आप समझदारी से आम खरीदना चाहते हैं, तो कुछ आसान संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है। केमिकल से पके आम अक्सर ऊपर से एकदम पीले और चमकीले दिखते हैं, लेकिन अंदर से कच्चे या फीके हो सकते हैं। इनमें प्राकृतिक खुशबू कम होती है और स्वाद भी अधूरा लगता है। वहीं पेड़ पर पके आम में हल्की-सी खुशबू, प्राकृतिक रंग और मिठास होती है, जो उसकी असली पहचान है।
घर पर आम को सुरक्षित तरीके से पकाना भी संभव है। इसके लिए आप कच्चे आम को अखबार या पेपर बैग में लपेटकर 5–7 दिन के लिए कमरे के तापमान पर रख सकते हैं। इसी तरह चावल के डिब्बे में रखना, केले या सेब के साथ रखना या सूखे भूसे में दबाकर रखना भी प्राकृतिक तरीके हैं, जिससे आम धीरे-धीरे और सुरक्षित तरीके से पकता है। इन तरीकों में समय जरूर लगता है, लेकिन स्वाद और सेहत दोनों सुरक्षित रहते हैं।
सरकार भी इस मामले में सख्त है। FSSAI ने साफ निर्देश दिए हैं कि फल पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित है। केवल लाइसेंस प्राप्त रिपनिंग चैंबर में नियंत्रित मात्रा में एथिलीन गैस का उपयोग ही मान्य है। नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना और लाइसेंस रद्द तक किया जा सकता है।
अगर आपको बाजार में केमिकल से पके आम का शक हो, तो आप इसकी शिकायत भी कर सकते हैं। इसके लिए फूड सेफ्टी कनेक्ट ऐप, FSSAI की वेबसाइट या टोल-फ्री नंबर 1800-11-2100 पर संपर्क किया जा सकता है। साथ ही, सबूत के तौर पर फोटो या वीडियो रखना भी जरूरी होता है।
आज जरूरत इस बात की है कि हम सस्ते और जल्दी पके आम के लालच में अपनी सेहत से समझौता न करें। थोड़ा समय लेकर नेचुरल तरीके से पका आम ही खाएं, क्योंकि असली स्वाद और सुरक्षा उसी में है।