छत्तीसगढ़ के Bilaspur से एक अहम राजनीतिक और कानूनी खबर सामने आई है। Chhattisgarh High Court ने नवागढ़ नगर पंचायत अध्यक्ष Siddhant Chauhan को बड़ी राहत देते हुए राज्य सरकार के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें उन्हें पद से हटा दिया गया था। इस फैसले के बाद फिलहाल वे अपने पद पर बने रहेंगे।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस एन.के. चंद्रवंशी की सिंगल बेंच ने राज्य सरकार के आदेश के प्रभाव को अस्थायी रूप से रोक दिया है। साथ ही अगली सुनवाई तक सिद्धांत चौहान को नगर पंचायत अध्यक्ष के रूप में कार्य करते रहने की अनुमति भी दी गई है।
दरअसल, सिद्धांत चौहान का चुनाव 15 फरवरी 2025 को सीधे जनता द्वारा किया गया था। इसके बाद 8 मार्च को हुई पहली बैठक में उपाध्यक्ष का चयन और प्रेसिडेंट इन काउंसिल का गठन हुआ। लेकिन कुछ समय बाद नगर पंचायत के कुछ सदस्यों के इस्तीफे को अध्यक्ष द्वारा स्वीकार नहीं किया गया, जिससे पार्षदों के बीच असहयोग की स्थिति पैदा हो गई।
इसी बीच राज्य सरकार ने Chhattisgarh Municipalities Act 1961 की धारा 41(क) के तहत 4 दिसंबर 2025 को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसके बाद 20 मार्च 2026 को आदेश जारी कर उन्हें पद से हटा दिया गया और आगे के कार्यकाल के लिए अयोग्य भी घोषित कर दिया गया।
इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए सिद्धांत चौहान ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनके अधिवक्ताओं ने कोर्ट में दलीलें पेश कीं, जिसके बाद प्रारंभिक सुनवाई में ही अदालत ने राज्य सरकार, नगरीय प्रशासन विभाग, कलेक्टर बेमेतरा और नगर पंचायत नवागढ़ को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
फिलहाल कोर्ट के इस फैसले से नवागढ़ की सियासत में बड़ा मोड़ आ गया है। अगली सुनवाई तक सिद्धांत चौहान अपने पद पर बने रहेंगे, जिससे राजनीतिक समीकरणों पर भी असर पड़ना तय माना जा रहा है।