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9% ग्रोथ के बावजूद भारत छठे स्थान पर क्यों? IMF रिपोर्ट ने खोली अर्थव्यवस्था की असली तस्वीर

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अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी International Monetary Fund के ताजा आंकड़ों ने भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर एक दिलचस्प लेकिन चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है। तेज रफ्तार से बढ़ती अर्थव्यवस्था होने के बावजूद भारत 2025 में एक पायदान नीचे खिसककर दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। ऐसे समय में जब देश ने करीब 9% की मजबूत ग्रोथ दर्ज की, यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर रैंकिंग क्यों गिरी?

दरअसल, इस पूरी कहानी का सबसे अहम पहलू “डॉलर बनाम रुपया” है। वैश्विक स्तर पर अर्थव्यवस्थाओं की तुलना अमेरिकी डॉलर में की जाती है, और यहीं भारत को झटका लगा। रुपये की कमजोरी ने भारत की डॉलर आधारित जीडीपी को प्रभावित किया, जिससे अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में गिरावट दर्ज हुई। आंकड़ों के मुताबिक, रुपया 2024 में जहां करीब 84.6 प्रति डॉलर था, वहीं 2025 में यह गिरकर लगभग 88.5 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। इसका सीधा असर यह हुआ कि रुपये में भले ही अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ी, लेकिन डॉलर में उसकी चमक फीकी पड़ गई।

भारत की अर्थव्यवस्था 2025 में करीब 3.92 ट्रिलियन डॉलर आंकी गई, जिससे वह ब्रिटेन और जापान जैसे देशों से पीछे रह गया। वहीं अमेरिका और चीन अपनी मजबूत स्थिति के साथ पहले और दूसरे स्थान पर बने हुए हैं, जबकि जर्मनी तीसरे स्थान पर कायम है। यानी भारत की असली चुनौती ग्रोथ नहीं, बल्कि ग्लोबल तुलना में उसकी वैल्यू का आकलन है।

इस गिरावट की एक और वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी रही है। भारत तेल आयात पर काफी हद तक निर्भर है, और जब वैश्विक बाजार में तेल महंगा होता है, तो इसका असर सीधे व्यापार घाटे और मुद्रा पर पड़ता है। इससे रुपये पर दबाव बढ़ता है और डॉलर के मुकाबले उसकी स्थिति कमजोर होती जाती है।

हालांकि, इस पूरी तस्वीर का सकारात्मक पक्ष भी उतना ही मजबूत है। IMF का अनुमान है कि यह गिरावट अस्थायी है और आने वाले वर्षों में भारत फिर तेजी से उभरेगा। 2027 तक भारत के फिर चौथे स्थान पर पहुंचने की संभावना जताई गई है, जबकि 2028 में जापान को पीछे छोड़ने का अनुमान है। इतना ही नहीं, 2031 तक भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है, जहां उसकी जीडीपी 6.79 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।

सबसे बड़ी बात यह है कि रैंकिंग में हल्की गिरावट के बावजूद भारत अभी भी दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है। मध्यम अवधि में 6% से ज्यादा की ग्रोथ दर बनाए रखने का अनुमान है, जो इसे बाकी देशों से अलग बनाता है।

कुल मिलाकर, यह स्थिति बताती है कि भारत की अर्थव्यवस्था अंदर से मजबूत है, लेकिन वैश्विक स्तर पर उसकी स्थिति कई बाहरी कारकों—जैसे मुद्रा विनिमय दर और तेल की कीमतों—पर भी निर्भर करती है। यानी चुनौती अस्थायी है, लेकिन दिशा अब भी मजबूत विकास की ओर ही इशारा कर रही है।

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