केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी CBSE ने कक्षा 10वीं के सेकेंड सेशन की बोर्ड परीक्षा का शेड्यूल जारी कर दिया है। इसके साथ ही लाखों छात्रों के लिए एक बार फिर अपनी परफॉर्मेंस सुधारने का मौका तय हो गया है। बोर्ड के अनुसार, सेशन-2 की परीक्षाएं 15 मई 2026 से शुरू होकर 21 मई 2026 तक चलेंगी।
इस बार की सबसे अहम बात यह है कि यह परीक्षा नए “टू बोर्ड एग्जाम सिस्टम” के तहत आयोजित की जा रही है, जिसे 2025-26 सत्र से लागू किया गया है। इस सिस्टम के जरिए छात्रों को साल में दो बार परीक्षा देने का विकल्प मिलता है, जिससे वे अपने नंबर बेहतर कर सकते हैं और एक ही परीक्षा पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
सेशन-2 की परीक्षा में वही छात्र शामिल हो सकेंगे, जिन्होंने पहले चरण यानी सेशन-1 में हिस्सा लिया था और अब अपने अंकों में सुधार करना चाहते हैं। खास तौर पर वे छात्र, जो अधिकतम तीन विषयों—जैसे साइंस, मैथ्स, सोशल साइंस या लैंग्वेज—में बेहतर स्कोर हासिल करना चाहते हैं, उन्हें यह मौका दिया गया है। इसके अलावा, जिन छात्रों को पहले चरण में कंपार्टमेंट मिला था या जो पिछले साल की कंपार्टमेंट कैटेगरी में थे, वे भी इस परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। बोर्ड ने स्पोर्ट्स कोटे के तहत छूट पाने वाले छात्रों और कुछ विशेष परिस्थितियों में आने वाले अभ्यर्थियों को भी अनुमति दी है।
हालांकि, सभी छात्रों को यह मौका नहीं मिलेगा। बोर्ड ने साफ कर दिया है कि जो छात्र पहले सेशन में तीन या उससे ज्यादा विषयों में अनुपस्थित रहे थे, वे सेशन-2 की परीक्षा में बैठने के पात्र नहीं होंगे। यानी यह मौका उन्हीं के लिए है, जिन्होंने पहले चरण में कम से कम बुनियादी उपस्थिति दर्ज कराई थी।
इससे पहले 15 अप्रैल 2026 को सेशन-1 का रिजल्ट जारी किया गया था, जिसमें लड़कियों ने एक बार फिर बेहतर प्रदर्शन करते हुए 94.99% पासिंग प्रतिशत हासिल किया, जबकि लड़कों का पास प्रतिशत 92.95% रहा। वहीं ट्रांसजेंडर छात्रों ने भी 91.30% रिजल्ट के साथ मजबूत प्रदर्शन किया। त्रिवेंद्रम रीजन ने 99.75% रिजल्ट के साथ टॉप किया, लेकिन बोर्ड की नीति के अनुसार कोई मेरिट लिस्ट या टॉपर घोषित नहीं किया गया।
CBSE की यह नीति पहले से ही स्पष्ट है कि छात्रों पर अनावश्यक प्रतिस्पर्धा का दबाव न बने, इसलिए न तो टॉपर्स घोषित किए जाते हैं और न ही स्कूलों को ऐसा करने की अनुमति दी जाती है। यह कदम छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और संतुलित प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
नए सिस्टम के तहत छात्रों को तीन विकल्प दिए गए हैं—वे चाहें तो सिर्फ एक बार परीक्षा दें, दोनों बार परीक्षा दें या किसी एक विषय में सुधार के लिए दूसरी बार परीक्षा में बैठें। अगर कोई छात्र दोनों बार परीक्षा देता है, तो उसका बेहतर स्कोर ही फाइनल माना जाएगा। इससे छात्रों को जोखिम लेने का डर भी कम हो जाता है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि दोनों परीक्षाएं पूरे सिलेबस पर आधारित होंगी और उनका फॉर्मेट भी एक जैसा रहेगा। वहीं प्रैक्टिकल और इंटरनल असेसमेंट केवल एक बार ही होंगे, जो पहले ही दिसंबर-जनवरी में आयोजित किए जा चुके हैं।
पास होने के लिए छात्रों को थ्योरी और इंटरनल असेसमेंट दोनों में कम से कम 33% अंक लाना जरूरी है। इस बार सेशन-1 की परीक्षा देशभर के 8 हजार से अधिक केंद्रों पर आयोजित की गई थी, जिसमें करीब 25 लाख छात्र शामिल हुए थे।
कुल मिलाकर, CBSE का यह नया सिस्टम छात्रों को एक दूसरा मौका देकर उनके भविष्य को अधिक सुरक्षित और लचीला बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब छात्रों के पास अपनी गलतियों को सुधारने और बेहतर परिणाम हासिल करने का एक और अवसर है।