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रूस का ‘अमर’ होने का फॉर्मूला: वैज्ञानिकों ने ढूंढ ली बुढ़ापा रोकने वाली दवा! जानिए कैसे करेगी काम?

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73 वर्षीय रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के विशेष आग्रह पर रूस के चोटी के वैज्ञानिक एक ऐसी दवा (जीन थेरेपी) विकसित कर रहे हैं, जो इंसान के बूढ़ा होने की प्रक्रिया को ही रोक देगी। रूस के फेडरल बायोमेडिकल एजेंसी के वैज्ञानिकों का दावा है कि वे दुनिया की पहली ‘एंटी-एजिंग’ जीन दवा बना रहे हैं। इस शोध का मुख्य उद्देश्य कोशिकाओं के क्षय को रोकना और शरीर को लंबे समय तक युवा बनाए रखना है। इस प्रोजेक्ट को रूस में बेहद गोपनीय और उच्च प्राथमिकता वाला माना जा रहा है।

​RAGE जीन: बुढ़ापे का असली विलेन
वैज्ञानिकों के अनुसार, हमारे शरीर में RAGE (Receptor for Advanced Glycation End-products) नामक एक जीन होता है, जो उम्र बढ़ने के साथ शरीर में सूजन और कोशिकाओं के डैमेज होने के लिए जिम्मेदार होता है। रूसी वैज्ञानिकों की यह नई दवा इसी RAGE जीन को ‘ब्लॉक’ या निष्क्रिय कर देगी। जब यह जीन काम करना बंद कर देगा, तो कोशिकाओं के टूटने और बूढ़ा होने की प्रक्रिया अत्यंत धीमी हो जाएगी, जिससे इंसान की उम्र बढ़ने का प्रभाव शरीर पर नहीं दिखेगा।

​कोशिकाओं का पुनर्जन्म और अंगों की मरम्मत
यह दवा केवल बाहरी झुर्रियों को नहीं हटाएगी, बल्कि कोशिकीय स्तर पर काम करेगी। यह जीन थेरेपी शरीर के महत्वपूर्ण अंगों, जैसे हृदय, मस्तिष्क और फेफड़ों की कोशिकाओं की मरम्मत करने में सक्षम होगी। शोधकर्ताओं का मानना है कि यदि RAGE जीन को सफलता पूर्वक नियंत्रित कर लिया गया, तो अल्जाइमर, पार्किंसंस और गठिया जैसी उम्र से संबंधित बीमारियों को भी जड़ से खत्म किया जा सकेगा।

पुतिन खुद इस रिसर्च में गहरी रुचि ले रहे हैं, क्योंकि वे रूस को चिकित्सा विज्ञान के इस नए युग का नेतृत्व करते देखना चाहते हैं।

​पुतिन के ‘अमर’ होने की चर्चा और वैश्विक हलचल
पश्चिमी मीडिया और कूटनीतिक हलकों में इस दवा को पुतिन के ‘अमर’ रहने की इच्छा से जोड़कर देखा जा रहा है। 73 साल की उम्र में भी बेहद सक्रिय दिखने वाले पुतिन अपने देश के वैज्ञानिकों पर इस बात के लिए दबाव बना रहे हैं कि वे ‘सक्रिय दीर्घायु’ का समाधान ढूंढें।

हालांकि, रूसी स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि यह शोध रूस की घटती जनसंख्या और बुजुर्गों के स्वास्थ्य को सुधारने के लिए है। इस तकनीक के सफल होने पर चिकित्सा विज्ञान के इतिहास में यह सबसे बड़ी खोज साबित हो सकती है।

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