छत्तीसगढ़ में परिवहन विभाग की सेवाएं कहने को तो ऑनलाइन हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। राज्य में इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनी ‘स्मार्ट लिंक सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड’ का अनुबंध (टेंडर) समाप्त होने के बाद अब विभाग का कामकाज मोबाइल हॉटस्पॉट के भरोसे चल रहा है। हाई-स्पीड इंटरनेट के अभाव में सारथी और वाहन पोर्टल पर काम करना बड़ी चुनौती बन गया है, जिससे हजारों मामले लंबित हो रहे हैं।
स्मार्ट लिंक सॉल्यूशन ने अनुबंध खत्म होते ही प्रदेश भर के आरटीओ कार्यालयों से अपने उपकरण (इंटरनेट लीज्ड लाइन, राउटर, एंटीना और केबल) समेट लिए हैं। बिलासपुर क्षेत्रीय कार्यालय में भी कंपनी सारा सामान समेट चुकी है। स्थिति ये है कि कर्मचारी अब अपने निजी मोबाइल से 4 से 5 जीबी डेटा का अतिरिक्त रिचार्ज कराकर किसी तरह काम खींच रहे हैं। गति धीमी होने के कारण पेंडेंसी लगातार बढ़ती जा रही है।
प्रभावित होने वाली मुख्य सेवाएं
इंटरनेट की सुस्त रफ्तार के कारण इन ऑनलाइन कार्यों पर ब्रेक लग गया है…
- ड्राइविंग लाइसेंस: लर्निंग, स्थाई लाइसेंस, नवीनीकरण, डुप्लीकेट लाइसेंस और स्लॉट बुकिंग।
- टैक्स व परमिट: रोड टैक्स भुगतान, फिटनेस सर्टिफिकेट, एनओसी और नेशनल/स्टेट परमिट।
- वाहन पंजीकरण: नए वाहनों का रजिस्ट्रेशन (फिलहाल 2 दिन पीछे चल रहा है), आरसी नवीनीकरण व स्वामित्व हस्तांतरण।
- अन्य: ऑनलाइन भुगतान और फैंसी नंबर की बुकिंग।
अपर आयुक्त का फरमान: ‘खुद करें व्यवस्था’ अपर परिवहन आयुक्त ने 7 अप्रैल को सभी आरटीओ और डीटीओ को पत्र जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि स्मार्ट लिंक की सेवाएं बंद हो चुकी हैं। निर्देश में सभी कार्यालय प्रमुखों को अपने स्तर पर इंटरनेट चालू रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने को कहा गया है। बजट की देरी को इस समस्या का मुख्य कारण बताया जा रहा है।
प्रक्रिया जारी है, जल्द होगी बहाली सालाना खर्च के लिए बजट स्वीकृति में कुछ समय लग गया था, इसीलिए जिला अधिकारियों को अस्थाई व्यवस्था के निर्देश दिए गए थे। अब बजट स्वीकृत हो चुका है और नए सर्विस प्रोवाइडर की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही सुचारू इंटरनेट व्यवस्था बहाल हो जाएगी। -डी. रविशंकर, अपर आयुक्त, परिवहन विभाग रायपुर