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UNGA में भारत की दो टूक, सुरक्षित और मानवीय प्रवासन व्यवस्था पर दिया जोर

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संयुक्त राष्ट्र महासभा यानी संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत ने वैश्विक प्रवासन को लेकर अपना स्पष्ट और संतुलित दृष्टिकोण दुनिया के सामने रखा। भारत ने कहा कि वह एक ऐसा प्रवासन ढांचा तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है जो सुरक्षित, मानवीय, समावेशी और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप हो। साथ ही भारत ने अनियमित प्रवासन, मानव तस्करी और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों से सख्ती से निपटने की बात भी कही।

न्यूयॉर्क में आयोजित ग्लोबल कॉम्पैक्ट फॉर माइग्रेशन के दूसरे अंतरराष्ट्रीय प्रवासन समीक्षा मंच को संबोधित करते हुए विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि प्रवासन केवल आंकड़ों का विषय नहीं है, बल्कि यह लोगों की आकांक्षाओं, मेहनत और समाज में उनके योगदान से जुड़ी मानवीय प्रक्रिया है।

उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसा प्रवासन मॉडल विकसित करने की कोशिश कर रहा है जो समावेशी और मानवीय होने के साथ भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार हो। इसके साथ ही भारत अवैध प्रवासन, मानव तस्करी और प्रवासियों की सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं पर भी गंभीरता से काम कर रहा है।

विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि भारत प्रवासन को एक “समग्र और व्यावहारिक” ढांचे के जरिए संचालित करता है। इसमें प्रवासियों की सुरक्षा, प्रवासन प्रक्रिया के हर चरण की निगरानी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना शामिल है।

उन्होंने बताया कि भारत दुनिया के सबसे बड़े प्रवासी समुदायों में से एक का प्रतिनिधित्व करता है। वर्तमान में 3.4 करोड़ से अधिक भारतीय मूल के लोग दुनिया के विभिन्न देशों में रह रहे हैं। भारत लगातार दुनिया में सबसे अधिक रेमिटेंस प्राप्त करने वाले देशों में शामिल रहा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्रवासी भारतीय वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत दोनों के लिए कितना बड़ा योगदान दे रहे हैं।

भारत ने सुरक्षित और नियमित प्रवासन को बढ़ावा देने के लिए कई देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते भी किए हैं। मंत्री ने बताया कि भारत अब तक 23 देशों के साथ व्यापक आवागमन समझौते और एमओयू पर हस्ताक्षर कर चुका है। इसके अलावा कई अन्य देशों के साथ भी बातचीत जारी है, ताकि प्रवासियों के लिए सुरक्षित और टिकाऊ रास्ते तैयार किए जा सकें।

भारत ने विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए डिजिटल और तकनीकी स्तर पर भी कई कदम उठाए हैं। मंत्री ने बताया कि “मदद” शिकायत निवारण पोर्टल और प्रवासी संसाधन केंद्रों के जरिए भारतीय नागरिकों को कांसुलर सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

इसके अलावा Passport Seva Portal के माध्यम से देश और विदेश में रहने वाले भारतीयों को तेज और आसान सेवाएं दी जा रही हैं। भारतीय समुदाय कल्याण कोष के जरिए जरूरतमंद भारतीयों को कानूनी सहायता, आपातकालीन मदद और स्वदेश वापसी जैसी सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं।

मंत्री ने कहा कि भारत ने कौशल विकास और यात्रा से पहले दिए जाने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भी मजबूत किया है, ताकि विदेश जाने वाले भारतीयों को उनके अधिकारों, सुरक्षा और मेजबान देशों की संस्कृति के बारे में बेहतर जानकारी मिल सके।

भारत का यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया भर में प्रवासन, शरणार्थी संकट, मानव तस्करी और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में बने हुए हैं। ऐसे में भारत ने स्पष्ट किया है कि वह मानवीय मूल्यों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के साथ सुरक्षित प्रवासन व्यवस्था को मजबूत करने के पक्ष में है।

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