बेटियों के भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित बनाने के लिए केंद्र सरकार की सुकन्या समृद्धि योजना आज भी सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय योजनाओं में गिनी जाती है। टैक्स छूट, सुरक्षित निवेश और बेहतर ब्याज दर की वजह से लाखों परिवार इस योजना को अपनी पहली पसंद बना चुके हैं। लेकिन अक्सर माता-पिता के मन में एक सवाल रहता है कि आखिर सुकन्या समृद्धि योजना में खाता खोलने का सबसे सही समय क्या होना चाहिए। नियमों के अनुसार तो बेटी के 10 साल पूरे होने से पहले कभी भी खाता खोला जा सकता है, लेकिन वित्तीय विशेषज्ञ मानते हैं कि जितनी जल्दी शुरुआत होगी, उतना बड़ा फायदा मिलेगा।
सरकार की इस योजना के तहत बेटी के जन्म से लेकर 10 साल की उम्र तक खाता खुलवाया जा सकता है। इसके बाद नया खाता खोलने की अनुमति नहीं होती। यानी परिवारों के पास लगभग 10 साल का समय जरूर रहता है, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस योजना का असली लाभ शुरुआती वर्षों में निवेश शुरू करने पर ही मिलता है। इसकी सबसे बड़ी वजह कंपाउंडिंग का असर है।
दरअसल, सुकन्या समृद्धि योजना लंबी अवधि की सेविंग स्कीम है। इसमें अभिभावकों को 15 साल तक निवेश करना होता है, जबकि खाता 21 साल बाद मैच्योर होता है। ऐसे में अगर बच्ची के जन्म के तुरंत बाद या शुरुआती वर्षों में खाता खोला जाता है तो जमा रकम को लंबे समय तक ब्याज मिलता रहता है। यही लंबा समय निवेश को बड़ी राशि में बदल देता है।
मान लीजिए किसी परिवार ने बेटी के एक साल की उम्र में खाता खोला, तो उस निवेश को पूरे 21 वर्षों तक बढ़ने का मौका मिलेगा। वहीं अगर वही खाता 8 या 9 साल की उम्र में खोला जाए तो कंपाउंडिंग के लिए मिलने वाला समय काफी कम हो जाता है। यही छोटा सा अंतर आगे चलकर लाखों रुपये के फर्क में बदल सकता है।
इस योजना की एक खास बात यह भी है कि 15 साल तक पैसा जमा करने के बाद भी खाते में ब्याज मिलता रहता है। यानी निवेश बंद होने के बावजूद पैसा बढ़ता रहता है। यही कारण है कि जल्दी शुरुआत करने वाले परिवारों को आगे चलकर बेटी की पढ़ाई, प्रोफेशनल कोर्स या शादी जैसे बड़े खर्चों के समय कम आर्थिक दबाव महसूस होता है।
आज के समय में उच्च शिक्षा का खर्च तेजी से बढ़ रहा है। मेडिकल, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट या विदेश में पढ़ाई जैसे विकल्पों के लिए लाखों रुपये की जरूरत पड़ती है। ऐसे में सुकन्या समृद्धि योजना लंबी अवधि में मजबूत फंड तैयार करने का अच्छा जरिया मानी जाती है। यही वजह है कि अधिकतर परिवार इसे बेटी की उच्च शिक्षा और शादी के लिए फाइनेंशियल सुरक्षा कवच की तरह इस्तेमाल करते हैं।
कई माता-पिता यह सोचकर योजना शुरू करने में देरी कर देते हैं कि शुरुआत में बड़ी रकम जमा करनी पड़ेगी, जबकि हकीकत इससे अलग है। इस योजना में न्यूनतम सालाना निवेश काफी कम रखा गया है, जिससे मध्यम वर्गीय परिवार भी आसानी से शुरुआत कर सकते हैं। बाद में आय बढ़ने पर निवेश राशि बढ़ाई जा सकती है। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआत में बड़ी रकम जमा करना जरूरी नहीं, बल्कि नियमित निवेश सबसे ज्यादा मायने रखता है।
हालांकि सलाहकार यह भी मानते हैं कि भविष्य की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए केवल एक योजना पर निर्भर रहना समझदारी नहीं होगी। सुकन्या समृद्धि योजना सुरक्षित और भरोसेमंद जरूर है, लेकिन इसके साथ अन्य निवेश विकल्पों को जोड़ना भी बेहतर रणनीति हो सकती है।
फिर भी सुरक्षा, टैक्स बेनिफिट और सरकारी गारंटी जैसी खूबियों की वजह से SSY आज भी बेटियों के भविष्य के लिए सबसे मजबूत निवेश योजनाओं में शामिल है। लेकिन इसका सबसे बड़ा फायदा उन्हीं परिवारों को मिलता है, जो समय रहते निवेश की शुरुआत कर देते हैं।