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स्पैम कॉल से मिलेगी राहत! 15 दिन में शिकायत नहीं सुलझाई तो टेलीकॉम कंपनियों पर लगेगा 50 लाख तक जुर्माना

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मोबाइल यूजर्स को रोजाना परेशान करने वाली स्पैम कॉल, फ्रॉड कॉल और खराब नेटवर्क जैसी समस्याओं पर अब सख्ती बढ़ने वाली है। दूरसंचार नियामक TRAI ने टेलीकॉम कंपनियों की जवाबदेही तय करने के लिए नए नियमों का ड्राफ्ट जारी किया है। अगर ये नियम लागू होते हैं तो कंपनियों को ग्राहकों की शिकायतें तय समय के भीतर सुलझानी होंगी, वरना भारी जुर्माना भरना पड़ेगा।

TRAI द्वारा जारी “टेलीकॉम उपभोक्ता शिकायत निवारण (चौथे सुधार) विनियम-2026” के ड्राफ्ट में साफ कहा गया है कि स्पैम कॉल, अनवांटेड प्रमोशनल कॉल, फ्रॉड कॉल और मोबाइल सेवा की खराब गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतों को अब कंपनियों को 24 घंटे और सातों दिन सुनना होगा। सबसे बड़ी बात यह है कि शिकायतों का निपटारा 15 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा। यदि कंपनियां तय समय में कार्रवाई नहीं करतीं तो उन पर अधिकतम 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

TRAI ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब केवल रिकॉर्डेड ऑटोमेटेड जवाब देकर कंपनियां अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकेंगी। ग्राहकों को जरूरत पड़ने पर महिला या पुरुष कस्टमर एग्जीक्यूटिव से सीधे बात करने की सुविधा देना अनिवार्य होगा। यानी अब उपभोक्ताओं को लंबे समय तक मशीनों से बात करके परेशान नहीं होना पड़ेगा।

नए ड्राफ्ट में प्रमोशनल कॉल्स को लेकर भी अहम बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। अब हर तरह की प्रमोशनल कॉल पर ग्राहकों को कॉलबैक की सुविधा देनी होगी। साथ ही किसी शिकायत पर कंपनी क्या कार्रवाई कर रही है, इसकी जानकारी ग्राहक को लगातार SMS, ईमेल और मोबाइल ऐप के जरिए देनी होगी।

TRAI ने गलत तरीके से शिकायत बंद करने पर भी सख्त दंड का प्रावधान रखा है। अगर कोई कंपनी बिना सही समाधान दिए शिकायत बंद करती है तो उसे प्रति शिकायत 1,000 रुपये का जुर्माना देना होगा। वहीं अपील के गलत निपटारे या लापरवाही पर प्रति केस 5,000 रुपये का दंड लगाया जाएगा।

ड्राफ्ट के मुताबिक, एक तिमाही में कुल जुर्माने की अधिकतम सीमा 50 लाख रुपये तय की गई है। यानी लगातार लापरवाही करने वाली कंपनियों पर बड़ा आर्थिक दबाव बनाया जाएगा।

रिपोर्टिंग में देरी करने पर भी कंपनियों को राहत नहीं मिलेगी। यदि कोई कंपनी अपनी तिमाही रिपोर्ट समय पर जमा नहीं करती तो पहले 15 दिनों तक प्रति दिन 5,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। इसके बाद यह राशि बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रतिदिन कर दी जाएगी। गंभीर मामलों में प्रति केस 10 लाख रुपये तक की वसूली भी की जा सकती है।

इसके अलावा अगर कोई कंपनी तय समय पर जुर्माना जमा नहीं करती तो उसे बकाया राशि पर अतिरिक्त ब्याज भी देना होगा। यानी अब टेलीकॉम कंपनियों के लिए नियमों की अनदेखी करना पहले जितना आसान नहीं रहेगा।

TRAI का मानना है कि इन नए नियमों से कंपनियों की जवाबदेही बढ़ेगी और वे उपभोक्ताओं की शिकायतों को जल्द और गंभीरता से सुलझाने के लिए मजबूर होंगी। अभी तक शिकायत निवारण को लेकर कोई स्पष्ट और सख्त दंड व्यवस्था नहीं थी, जिसके कारण उपभोक्ताओं को लंबे समय तक परेशान होना पड़ता था।

अगर यह ड्राफ्ट लागू हो जाता है तो करोड़ों मोबाइल यूजर्स को स्पैम कॉल और खराब नेटवर्क जैसी परेशानियों से काफी राहत मिल सकती है। खासकर लगातार आने वाली फर्जी कॉल्स और अधूरी शिकायत प्रक्रिया से परेशान लोगों के लिए यह बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

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