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रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर, 1 डॉलर हुआ ₹95.50 का, महंगाई बढ़ने का खतरा गहराया

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भारतीय रुपया मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। डॉलर के मुकाबले रुपया 19 पैसे टूटकर ₹95.50 प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जो अब तक का रिकॉर्ड लो माना जा रहा है। इससे पहले सोमवार को रुपया ₹95.31 पर बंद हुआ था। लगातार गिरती भारतीय मुद्रा ने बाजार और आम लोगों दोनों की चिंता बढ़ा दी है।

इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ संघर्ष विराम को “कमजोर” बताया, जिसके बाद वैश्विक बाजारों में तनाव बढ़ गया। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा और Brent Crude की कीमतें बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं।

भारत अपनी जरूरत का लगभग 80 से 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने पर देश को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। यही वजह है कि डॉलर की मांग बढ़ने के साथ रुपया कमजोर होता जा रहा है।

विशेषज्ञों के मुताबिक बढ़ता जियोपॉलिटिकल तनाव भी रुपये पर भारी दबाव डाल रहा है। वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने पर विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ते हैं। इस दौरान अमेरिकी डॉलर को सबसे सुरक्षित मुद्रा माना जाता है, जिससे डॉलर की मांग और मजबूत हो जाती है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी रुपये की कमजोरी की एक बड़ी वजह मानी जा रही है। जब विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकालते हैं, तो वे उसे डॉलर में बदलते हैं। इससे भारतीय बाजार से डॉलर बाहर जाता है और रुपये पर दबाव बढ़ता है।

रुपये में आई इस गिरावट का असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है। सबसे पहले पेट्रोल-डीजल और LPG जैसी जरूरी चीजें महंगी होने का खतरा बढ़ गया है। इसके अलावा मोबाइल, लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक्स और आयातित सामानों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं, क्योंकि इनके भुगतान डॉलर में किए जाते हैं।

विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों और विदेश घूमने की योजना बना रहे लोगों पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा। अब डॉलर खरीदने के लिए पहले से ज्यादा रुपये खर्च करने होंगे। वहीं बढ़ती तेल कीमतों के कारण रिटेल महंगाई बढ़ने की आशंका भी तेज हो गई है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक OPEC देशों का तेल उत्पादन पिछले दो दशकों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। वहीं सऊदी अरामको के CEO अमीन नासिर ने चेतावनी दी है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल सप्लाई में रुकावट की स्थिति 2027 तक असर डाल सकती है।

JPMorgan Chase की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि भले ही अगले महीने होर्मुज मार्ग खुल जाए, लेकिन इस साल कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के आसपास बनी रह सकती हैं। इसका कारण टैंकरों और लॉजिस्टिक्स की कमी बताया गया है।

भारत पर बढ़ते आर्थिक दबाव को देखते हुए प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी नागरिकों से ईंधन की बचत और गैर-जरूरी खर्च कम करने की अपील की है। सरकार और RBI अब रुपये को स्थिर रखने के लिए आगे क्या कदम उठाते हैं, इस पर बाजार की नजर बनी हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक तनाव और तेल की कीमतों में तेजी जारी रही, तो आने वाले दिनों में रुपये पर और दबाव देखने को मिल सकता है।

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