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सनबर्न को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी, बढ़ सकता है स्किन कैंसर का खतरा, जानिए बचाव के जरूरी तरीके

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गर्मियों की तेज धूप सिर्फ शरीर ही नहीं, त्वचा को भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। लंबे समय तक धूप में रहने से स्किन में जलन, लालिमा, चुभन और सूजन जैसी समस्याएं होने लगती हैं, जिन्हें अक्सर लोग सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन यही सनबर्न आगे चलकर त्वचा को गहरा नुकसान पहुंचा सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक बार-बार होने वाला सनबर्न स्किन एजिंग, पिग्मेंटेशन और यहां तक कि स्किन कैंसर के खतरे को भी बढ़ा सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी World Health Organization के अनुसार सूरज की UV किरणों के ज्यादा संपर्क में रहने से त्वचा की ऊपरी परत को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। खासकर जब कोई व्यक्ति बिना किसी सुरक्षा के लंबे समय तक धूप में रहता है।

दिल्ली के श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट के सीनियर डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. निपुण जैन के मुताबिक सनबर्न तब होता है जब सूरज की UV किरणें त्वचा की कोशिकाओं के DNA को नुकसान पहुंचाने लगती हैं। इसके बाद शरीर का इम्यून सिस्टम सक्रिय होकर उस हिस्से में ब्लड फ्लो बढ़ा देता है, जिससे त्वचा लाल, गर्म और सूजी हुई महसूस होती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि गोरी या संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को तेज धूप में सिर्फ 10 से 20 मिनट रहने पर भी सनबर्न हो सकता है। वहीं गेहूंआ या सांवली त्वचा वाले लोगों में 20 से 40 मिनट की सीधी धूप से यह समस्या शुरू हो सकती है। सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे के बीच की धूप सबसे ज्यादा खतरनाक मानी जाती है।

कई लोग यह मानते हैं कि बादलों वाले मौसम में सनबर्न नहीं होता, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार बादल UV किरणों को पूरी तरह नहीं रोक पाते। करीब 70 से 80 प्रतिशत UV किरणें बादलों के बावजूद त्वचा तक पहुंच जाती हैं और नुकसान पहुंचा सकती हैं।

सनबर्न और टैनिंग में भी बड़ा अंतर होता है। टैनिंग में त्वचा का रंग गहरा हो जाता है, जबकि सनबर्न में त्वचा लाल, गर्म और दर्दभरी हो जाती है। ज्यादा नुकसान होने पर कुछ दिनों बाद त्वचा छिलने भी लगती है।

डॉक्टरों के अनुसार अगर सनबर्न के बाद त्वचा पर बड़े फफोले बनने लगें, तेज दर्द हो, 101°F से ज्यादा बुखार आए, चक्कर या उलझन महसूस हो तो तुरंत डर्मेटोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए यह और ज्यादा खतरनाक हो सकता है।

बार-बार सनबर्न होने से स्किन कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है। UV किरणें त्वचा की कोशिकाओं के DNA को लगातार नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे कैंसर की संभावना बढ़ जाती है। जिन लोगों की त्वचा ज्यादा संवेदनशील होती है, जिनके परिवार में स्किन कैंसर की हिस्ट्री रही हो या जो लंबे समय तक धूप में काम करते हों, उनमें जोखिम ज्यादा माना जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार सुबह 8 बजे से पहले और शाम 5 बजे के बाद की हल्की धूप अपेक्षाकृत सुरक्षित मानी जाती है। इस दौरान 15 से 30 मिनट धूप में रहने से शरीर को विटामिन D भी मिलता है और स्किन को ज्यादा नुकसान भी नहीं होता।

अगर सनबर्न हो जाए तो सबसे पहले प्रभावित हिस्से को ठंडा करना चाहिए। ठंडे पानी से नहाना, ठंडी पट्टी रखना और खुशबूदार साबुन या केमिकल प्रोडक्ट्स से बचना फायदेमंद माना जाता है। एलोवेरा जेल को भी सनबर्न में काफी असरदार माना जाता है क्योंकि यह त्वचा को ठंडक और राहत देता है।

डॉक्टरों का कहना है कि सनबर्न से बचाव के लिए कुछ आसान आदतें बेहद जरूरी हैं। बाहर निकलते समय ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन लगाना, धूप में टोपी और फुल स्लीव कपड़े पहनना, धूप के पीक टाइम में बाहर जाने से बचना और पर्याप्त पानी पीना बेहद जरूरी है। सनस्क्रीन को हर 2 से 3 घंटे में दोबारा लगाना भी जरूरी माना जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि हेल्दी लाइफस्टाइल, संतुलित खानपान और सन सेफ्टी अपनाकर स्किन कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसलिए सनबर्न को सिर्फ एक सामान्य स्किन प्रॉब्लम समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।

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