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Fuel Price Hike: पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर भारी उछाल, पिछले 10 दिनों में चौथी बार हुआ बड़ा इजाफा

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घरेलू खुदरा बाजार में आम उपभोक्ताओं को महंगाई का एक और तगड़ा झटका लगा है। सरकारी तेल कंपनियों ने सोमवार सुबह देशव्यापी स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ा इजाफा कर दिया है। तेल कंपनियों द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, पेट्रोल की कीमत में ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल के दामों में ₹2.71 प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

इस ताजा संशोधन के बाद देश के कई प्रमुख शहरों में पेट्रोल की कीमतें ₹100 के पार पहुंच चुकी हैं। गौरतलब है कि पिछले महज 10 दिनों के भीतर ईंधन के दामों में बढ़ोत्तरी का यह चौथा कड़ा प्रहार है, जिससे माल ढुलाई महंगी होने और आने वाले दिनों में लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ने की सीधी आशंका है।

​दिल्ली से मुंबई तक चारों महानगरों में ईंधन के दाम नए रिकॉर्ड पर
​आज सुबह 6:00 बजे से देश के चारों बड़े महानगरों में लागू हुई पेट्रोल और डीजल की नई दरों की आधिकारिक सूची इस प्रकार है:

पेट्रोल के नए दाम:

  • ​दिल्ली: ₹102.12 प्रति लीटर (वृद्घि: +₹2.61)
  • ​मुंबई: ₹111.21 प्रति लीटर (वृद्घि: +₹2.72)
  • ​कोलकाता: ₹113.51 प्रति लीटर (वृद्घि: +₹2.87)
  • ​चेन्नई: ₹107.77 प्रति लीटर (वृद्घि: +₹2.46)

​डीजल के नए दाम:

  • ​दिल्ली: ₹95.20 प्रति लीटर (वृद्घि: +₹2.71)
  • ​कोलकाता: ₹99.82 प्रति लीटर (वृद्घि: +₹2.80)
  • ​मुंबई: ₹97.83 प्रति लीटर (वृद्घि: +₹2.81)

​कच्चे तेल के बाजार में भारी उतार-चढ़ाव, ब्रेंट क्रूड में आई आंशिक गिरावट
अगर वैश्विक बाजार की हलचलों पर नजर डालें, तो सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी नरमी जरूर देखी गई है। ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 4.55% की गिरावट के साथ $98.83 प्रति बैरल पर आ गया है, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड भी करीब 4.73% गिरकर $92.03 प्रति बैरल पर पहुंच चुका है। बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही संभावित शांति वार्ता और सकारात्मक परमाणु समझौते की उम्मीदों के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल दो हफ्ते के अपने सबसे निचले स्तर पर फिसला है।

​होर्मुज जलमार्ग पर जारी गतिरोध के चलते अभी भी सप्लाई चेन बाधित
ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें टूटने के बावजूद घरेलू स्तर पर आम जनता को राहत नहीं मिल पा रही है। इसकी सबसे बड़ी कूटनीतिक वजह यह है कि अमेरिका और ईरान के बीच अभी भी कुछ बेहद संवेदनशील रणनीतिक मुद्दों पर पूर्ण सहमति नहीं बन सकी है। इन विवादित मुद्दों में सबसे प्रमुख ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ पर लगी रोक का जारी रहना है।

इसके चलते मिडल-ईस्ट से होने वाली वैश्विक तेल की वास्तविक सप्लाई अभी भी आंशिक रूप से बाधित है। घरेलू तेल कंपनियों का कहना है कि इसी सप्लाई चेन के संकट और अंडर-रिकवरी की वजह से खुदरा कीमतों में लगातार चौथे दौर का यह बड़ा इजाफा करना पड़ा है।

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