छत्तीसगढ़ में आवारा कुत्तों के हमलों को लेकर अब मामला अदालतों तक पहुंच गया है। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट देशभर में बढ़ती डॉग बाइट घटनाओं पर स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ बिलासपुर हाईकोर्ट में भी एक बेहद संवेदनशील याचिका दायर की गई है। इस याचिका में एक पिता ने दावा किया है कि उसके बेटे की मौत कुत्ते के काटने की वजह से हुई और अब उसने राज्य सरकार से 4 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग की है।
यह मामला बिलासपुर हाईकोर्ट की वेकेशन बेंच में जस्टिस एनके व्यास के सामने सुनवाई के लिए आया। याचिकाकर्ता धीरज पारधी ने कोर्ट को बताया कि उसके बेटे की मौत आवारा कुत्ते के काटने के बाद हुई थी। बेटे को खोने के बाद परिवार को गहरे सदमे का सामना करना पड़ा और अब उन्होंने शासन से आर्थिक सहायता की मांग करते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को शपथ पत्र के साथ जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने पूछा है कि आखिर ऐसी घटनाओं में सरकार की जिम्मेदारी क्या बनती है और क्या पीड़ित परिवार को मुआवजा दिया जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई 30 जून को तय की गई है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता आरके गुप्ता ने कोर्ट को बताया कि फिलहाल शासन के पास ऐसा कोई स्पष्ट कानून या नियम नहीं है, जिसके तहत कुत्ते के काटने से मौत होने पर मुआवजा दिया जा सके। यही वजह है कि यह मामला अब सरकार के लिए कानूनी और प्रशासनिक उलझन बनता जा रहा है।
इस याचिका ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर शहरों और कस्बों में बढ़ते आवारा कुत्तों के आतंक की जिम्मेदारी किसकी है। आए दिन बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों पर कुत्तों के हमले की खबरें सामने आती रहती हैं, लेकिन इसके बावजूद ठोस नीति या सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
अब सभी की नजर हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हुई है, क्योंकि यह मामला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक बड़ी कानूनी मिसाल भी बन सकता है। अगर कोर्ट सरकार को मुआवजा देने के निर्देश देता है, तो आने वाले समय में डॉग बाइट पीड़ितों के लिए नए नियम और नीतियां बन सकती हैं।