भारतीय करेंसी के इतिहास में जल्द ही एक बहुत बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल सकता है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया देश में जल्द ही प्लास्टिक के बैंक नोट जारी करने के अपने 14 साल पुराने प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी देने की तैयारी कर रहा है। बैंकिंग सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आरबीआई की पिछली दो महत्वपूर्ण बोर्ड मीटिंग्स के दौरान इस विषय पर बेहद गंभीरता से चर्चा की गई है। दिलचस्प बात यह है कि ये दोनों उच्च स्तरीय बैठकें पटना और मुंबई में आयोजित हुई थीं, जिसके बाद अब केंद्रीय बैंक की तरफ से प्लास्टिक नोट्स को लेकर एक नए पायलट प्रोजेक्ट के एलान की उम्मीदें बेहद बढ़ गई हैं।
नोटों की छपाई पर होने वाले अरबों रुपये के भारी खर्च को कम करने की कवायद
आरबीआई द्वारा इस बड़े कदम को उठाने के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण माने जा रहे हैं, जिसमें पहला कारण लागत से जुड़ा है और दूसरा नोटों की लंबी शेल्फ लाइफ है। मौजूदा समय में देश में कागज के नोटों को प्रिंट करने और उनके रखरखाव पर हर साल भारी-भरकम रकम खर्च होती है।
एक सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में ही करीब 23.8 अरब खराब और फटे हुए नोटों को चलन से बाहर करना पड़ा था, जबकि इससे पिछले साल 2023-24 में यह संख्या 21.24 अरब थी। इन नोटों को दोबारा छापने के लिए आरबीआई को हर साल 5 हजार से 6 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च करनी पड़ती है, जिसे प्लास्टिक नोटों के जरिए काफी हद तक बचाया जा सकता है।
गंदगी, नमी और पानी से नहीं होंगे खराब, आसानी से मोड़े जा सकेंगे नए नोट
पॉलीमर से बनने वाले इन बैंक नोटों की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि ये एक बेहद पतली और लचीली प्लास्टिक पर प्रिंट किए जाते हैं। प्लास्टिक से निर्मित होने के बावजूद ये आपके क्रेडिट या डेबिट कार्ड की तरह सख्त नहीं होते हैं, बल्कि काफी हल्के होते हैं जिन्हें आम कागजी मुद्रा की तरह आसानी से मोड़ा जा सकता है।
इन नोटों पर गंदगी, पानी और नमी का कोई असर नहीं पड़ता है, जिसके कारण ये लंबे समय तक फटने से सुरक्षित रहते हैं और इनमें जालसाजी को रोकने के लिए कई अत्याधुनिक सुरक्षा फीचर्स भी शामिल किए जा सकते हैं।
साल 2012 में भी हुआ था फील्ड ट्रायल, दुनिया के 60 देशों में है चलन
ऐसा पहली बार नहीं है जब देश में प्लास्टिक नोट लाने की कोशिश की जा रही हो। इससे पहले साल 2012 में तत्कालीन केंद्र सरकार और आरबीआई ने कोच्चि, मैसूरु, जयपुर, भुवनेश्वर और शिमला समेत देश के 5 प्रमुख शहरों में 10 रुपये के करीब 1 अरब प्लास्टिक नोटों का एक फील्ड ट्रायल शुरू किया था।
हालांकि, उस समय कुछ तकनीकी और परिचालन संबंधी दिक्कतों के चलते इस ट्रायल को रोकना पड़ा था, लेकिन अब सुरक्षा एजेंसियों और आरबीआई ने उन सभी कमियों को पूरी तरह दूर कर लिया है। गौरतलब है कि इस समय दुनिया के करीब 60 विकसित देश प्लास्टिक नोटों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसमें ऑस्ट्रेलिया ने सबसे पहले साल 1998 में इसकी शुरुआत की थी और उसके बाद कनाडा, ब्रिटेन, सिंगापुर और न्यूजीलैंड जैसे देशों ने भी इसे अपनाया है।