रायपुर। प्रदेश में अब बिजली उपभोक्ताओं की मीटर रीडिंग को भी स्मार्ट किया जा रहा है। इस महीने पहली बार इसका सफल ट्रायल किया गया। स्मार्ट मीटरों की रीडिंग सीधे कंट्रोल रूम से बैठकर की जा रही है। उपभोक्ताओं को सीधे उनके मोबाइल नंबर पर मैसेज के माध्यम से बिल भेजा जा रहा है।
सफल प्रयोग के बाद आने वाले समय में ऑनलाइन रीडिंग का ही सिस्टम चलेगा। इसके लिए छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर कंपनी को बिजली नियामक आयोग से मंजूरी लेनी पड़ेगी। ऑनलाइन रीडिंग सिस्टम से पॉवर कंपनी को माह करीब छह करोड़ की बचत होगी। वहीं दूसरी ओर करीब 5000 रीडर बेरोजगार हो जाएंगे। केंद्र सरकार की योजना के तहत छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर लगाने का काम चल रहा है।
उपभोक्ता को स्मार्ट मीटर लगाने के लिए बाध्य नहीं
प्रदेश के 65 लाख से ज्यादा बिजली उपभोक्ताओं में से करीब 35 लाख के मीटरों को बदलकर स्मार्ट मीटर लगा दिए गए हैं। बचे मीटरों को भी बदलने का काम चल रहा है, लेकिन अब किसी भी उपभोक्ता को स्मार्ट मीटर लगाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है। पहले सभी उपभोक्ताओं के मीटरों को बदलने के बाद कनेक्शनों को प्रीपैड करने की योजना थी। लेकिन अब यह योजना खटाई में पड़ गई है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने खुद ही इसको रद्द कर दिया है। उत्तर प्रदेश में प्रीपैड मीटरों को लेकर विवाद के बाद यह बात सामने आई कि एक्ट में प्रीपैड का प्रावधान ही नहीं है। ऐसे में ऊर्जा मंत्रालय को अपना पुराना आदेश बदलना पड़ा है।
मीटर से सीधे कंट्रोल रूम में रीडिंग
अब गुढियारी के कंट्रोल रूम से सीधे उपभोक्ताओं की माह के अंतिम दिन की रीडिंग देखकर बिल आएगा। ऐसा ही जून के बिल में किया गया है। ऐसा होने से 30 दिनों के स्थान पर ज्यादा दिनों में रीडिंग होने की शिकायत भी नहीं रहेगी। इसका बड़ा फायदा पॉवर कंपनी को यह होगा कि उसके हर माह करीब छह करोड़ बचेंगे। इस समय प्रदेश में 65 लाख से ज्यादा उपभोक्ता हैं। इनकी रीडिंग करने के लिए रीडरों को शहरों से ग्रामीण क्षेत्र में 8 से 12 रुपए प्रति कनेक्शन के हिसाब से पैसे दिए जाते हैं। ऐसे में हर माह करीब छह करोड़ खर्च होते हैं।
पेपरलेस बिलिंग की तैयारी
छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर कंपनी पेपरलैस बिजली बिल पर काम कर रहा है। जून में स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ताओं को सीधे उनके मोबाइल पर बिल भेजा गया है। इससे एक बड़ा फायदा यह है कि उपभोक्ताओं को रीडरों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अक्सर रीडिंग गलत होने की शिकायत भी रहती है। ऐसी शिकायत भी नहीं रहेगी। वहीं मकान बंद होने पर औसत रीडिंग के बाद होने वाले विवाद खत्म हो जाएंगे।
आयोग से लेंगे मंजूरी
वितरण कंपनी के एमडी भीमसिंह कंवर ने बताया कि, बिजली बिल को पेपरलेस करने के लिए ऑनलाइन बिलिंग प्रारंभ की गई है। अभी इसका ट्रायल कर रहे हैं, स्थाई व्यवस्था के लिए बिजली नियामक आयोग से मंजूरी लेनी पड़ेगी।