मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक और प्रसिद्ध रायसेन किले में इन दिनों एक अनोखा घटनाक्रम लोगों के आकर्षण और चर्चा का केंद्र बना हुआ है। भोपाल से करीब 45 किलोमीटर दूर स्थित इस प्राचीन किले की पहाड़ियों पर पिछले लगभग 15 दिनों से एक बाघ की सक्रिय मौजूदगी दर्ज की जा रही है। वन विभाग ने इसकी पुष्टि करते हुए पर्यटकों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किले के कुछ संवेदनशील हिस्सों में प्रवेश पर अस्थायी रोक लगा दी है।
बाघ की मौजूदगी का पहला संकेत उस समय मिला जब सुबह टहलने निकले स्थानीय लोगों ने पहाड़ी क्षेत्र में ताजा पगमार्क देखे। इसके बाद सूचना वन विभाग तक पहुंची और अधिकारियों ने तत्काल इलाके की निगरानी बढ़ा दी। जांच के दौरान किले और आसपास के क्षेत्रों में लगाए गए कैमरा ट्रैप में भी बाघ की गतिविधियां रिकॉर्ड हुईं, जिससे उसकी मौजूदगी की पुष्टि हो गई।
वन अधिकारियों के अनुसार बाघ ने किले परिसर में स्थित सोमेश्वर धाम मंदिर के आसपास के क्षेत्र को अपना अस्थायी ठिकाना बना लिया है। मंदिर के पास मौजूद प्राकृतिक जलकुंड के आसपास उसे कई बार देखा गया है। कैमरा ट्रैप की तस्वीरों में बाघ को पानी पीते, आराम करते और आसपास के क्षेत्र में घूमते हुए कैद किया गया है। माना जा रहा है कि जल और सुरक्षित वातावरण मिलने के कारण बाघ ने इस इलाके को कुछ समय के लिए अपना निवास क्षेत्र बना लिया है।
जिला वन अधिकारी प्रतिभा शुक्ला ने बताया कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। वन विभाग की टीम चौबीसों घंटे क्षेत्र की निगरानी कर रही है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके। इसके लिए अतिरिक्त कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं और बाघ की गतिविधियों का लगातार अध्ययन किया जा रहा है।
पर्यटकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए वन विभाग ने किले के कुछ संवेदनशील क्षेत्रों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। विशेष रूप से सोमेश्वर धाम मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग और कुछ पहाड़ी हिस्सों में बैरिकेडिंग कर दी गई है। मुख्य प्रवेश मार्गों पर चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं, जिनमें बाघ की मौजूदगी की जानकारी स्पष्ट रूप से दी गई है।
इसके अलावा फॉरेस्ट गार्ड्स और वन विभाग के कर्मचारियों की तैनाती बढ़ा दी गई है। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी पर्यटक को प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश न करने दिया जाए। विभाग लगातार पर्यटकों को सतर्क रहने और निर्धारित मार्गों से ही भ्रमण करने की सलाह दे रहा है।
रायसेन किला मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों में से एक माना जाता है। यहां बड़ी संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु आते हैं। ऐसे में बाघ की मौजूदगी ने जहां वन्यजीव प्रेमियों की उत्सुकता बढ़ा दी है, वहीं सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क है।
वन विभाग का कहना है कि फिलहाल बाघ ने किसी व्यक्ति या पशु पर हमला नहीं किया है और उसका व्यवहार सामान्य वन्यजीव जैसा ही है। फिर भी एहतियात के तौर पर सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि यदि बाघ स्वयं जंगल की ओर वापस नहीं लौटता है, तो आगे की रणनीति विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर तय की जाएगी।
फिलहाल रायसेन किला इतिहास और वन्यजीव दोनों के कारण चर्चा में है, जहां एक ओर सदियों पुरानी विरासत मौजूद है, वहीं दूसरी ओर एक बाघ की मौजूदगी ने पूरे इलाके को रोमांच और सतर्कता के माहौल में ला दिया है।