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छत्तीसगढ़ में अब दो नहीं तीन हस्तियों को मिलेगा पद्मश्री ! पहले विदेशी दोस्तों को खुश करने के लिए बांटे जाते थे पद्मश्री पुरस्कार….!

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गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों की घोषणा की गई थी जिसमें शुरू में छत्तीसगढ़ से दो हस्तियों को पद्मश्री सम्मान मिलने की जानकारी मिली थी लेकिन अब इसमें एक और नाम जुड़ गया है।

छत्तीसगढ़ से अब तीन लोगों को पद्मश्री सम्मान मिलेगा। जिसमें जशपुर के जागेश्वर यादव, रायगढ़ के रामलाल बरेठ और नारायणपुर के हेमचंद मांझी का नाम शामिल है

इन तीनों हस्तियों नए पद्मश्री को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने फोन पर बधाई भी दी है। देश की कुल 34 हस्तियों को पुरुस्कार दिया गया है।
जिसमें सबसे पहले 23 जनवरी को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने की घोषणा की गई थी।

इसके बाद 25 जनवरी को घोषित पद्मश्री सम्मान प्राप्त करने वालों में छत्तीसगढ़ से एक और विभूति का नाम शामिल पंडित रामलाल बरेठ को कला के क्षेत्र में पद्मश्री सम्मान की घोषणा की गई। रायगढ़ जिले के राम लाल बरेठ कथक के नर्तक हैं ,पूर्व में इन्हें अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

पद्म पुरुस्कृत छत्तीसगढ़ की हस्तियों की संक्षिप्त जानकारी:

कथक के उम्दा नर्तक हैं पं. रामलाल बरेठ

रायगढ़ के पं.रामलाल बरेठ।


बिलासपुर संभाग के रायगढ़ जिले के रहने वाले पंडित रामलाल बरेठ को कला के क्षेत्र में पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया है। बरेठ कथक के उम्दा नर्तक हैं। पूर्व में उन्हें अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

जागेश्वर यादव जिन्हें बिरहोर के भाई के नाम से जाना जाता है।
जशपुर के जागेश्वर यादव।

जशपुर के जागेश्वर यादव।

जागेश्वर जशपुर में आदिवासी कल्याण के लिए काम करने वाले एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं । इन्होंने आदिवासियों के उत्थान के लिए अपनी जिंदगी समर्पित कर दी। हाशिए पर पड़े समाज के लोगों की सेवा का जिम्मा उठाया। बिरहोर और पहाड़ी कोरवा जैसी जनजातियों के लिए इन्होंने काम किया ।

जशपुर में एक आश्रम की स्थापना की। जहां यह आदिवासी समुदाय की निरक्षरता को खत्म करने और उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं में सुविधा देने के लिए काम करते हैं । महामारी के दौरान टीकाकरण की सुविधा पहुंचाई, शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए जागरूकता अभियान चलाए। खुद की आर्थिक तंगी होने के बावजूद यह सामाजिक परिवर्तन लाने के काम को करते रहे, जागेश्वर को बिरहोर के भाई के नाम से भी क्षेत्र में जाना जाता है।

नारायणपुर के हेमचंद मांझी।

हेमचंद मांझी जिन्हें वैद्यराज मांझी भी कहा जाता है।

नारायणपुर के हेमचंद मांझी।

प्राचीन औषधि परंपराओं को आगे ले जाने का काम हेमराज करते हैं। नारायणपुर जिले के रहने वाले हेमराज लोगों को अपने औषधि ज्ञान की वजह से सस्ती स्वास्थ्य सेवा देते हैं। 5 दशकों से अधिक समय से ग्रामीण इलाकों में यह काम कर रहे हैं। महज 15 साल की उम्र से ही जरूरतमंद लोगों की सेवा कर रहे हैं।

जड़ी बूटियों के अपने विशेष ज्ञान के लिए जाने जाते हैं। अबूझमाड़ के सुदूर जंगल में मरीजों के इलाज के लिए तमाम मुश्किलों और नक्सली खतरे को पारकर पहुंच जाते हैं। उनकी सेवा का भाव देखकर नक्सलियों ने उन्हें बार-बार धमकाया, कई बार इनपर हमले भी हुए मगर अपनी ईमानदारी से लोगों तक इलाज की सुविधा पहुंचाने का काम हेमराज करते रहे हैं। हेमराज को वैद्यराज मांझी के नाम से इलाके के लोग जानते हैं।

फोन पर बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा…

मुख्यमंत्री ने जशपुर के जागेश्वर यादव को फोन कर बधाई भी दी। साय ने कहा कि उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मश्री पुरस्कार मिला है और राष्ट्रपति जी से पुरस्कार लेने उन्हें दिल्ली जाना है। यादव को आदिवासियों के उत्थान के लिए समर्पित भाव से कार्य करने के लिए छत्तीसगढ़ शासन की ओर से शहीद वीर नारायण सिंह सम्मान भी प्रदान किया गया है।

छत्तीसगढ़ में अब तक 29 लोगों को पद्मश्री सम्मान

साल 1976 से लेकर 2023 तक छत्तीसगढ़ में 26 लोगों को पद्मश्री सम्मान मिल चुका है। पंडित राम लाल बरेठ, जागेश्वर यादव, वैद्यराज हेमचंद मांझी का नाम पद्मश्री के लिए घोषित होने पर पद्मश्री सम्मान से विभूषित होने वालों की संख्या 29 हो जाएगी।

पंडवानी गायिका तीजन बाई को मिला है तीनों पद्म सम्मान

विश्व विख्यात पंडवानी गायिका तीजन बाई छत्तीसगढ़ की एक मात्र ऐसी हस्ती है, जिन्हें भारत सरकार द्वारा भारतीय नागरिकों को दिया जाने वाला तीनों पद्म सम्मान मिला है। तीजन बाई को लोक गायन (पंडवानी) के क्षेत्र में उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए वर्ष 1988 में पद्मश्री, वर्ष 2003 में पद्म भूषण तथा वर्ष 2019 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया जा चुका है।
2014 में मोदी सरकार बनने के बाद 2015 से देश भर में गुमनाम किंतु प्रतिभावान हस्तियों को ढूंढ ढूंढ कर पद्म पुरस्कार दिए जा रहे हैं जबकि इससे पहले आरोप लगाते रहे हैं कि विदेशी दोस्तों को खुश करने के लिए अपात्र लोगों को पद्म पुरस्कार बांटे जाते थे कई पद्म पुरस्कार तो सिर्फ राजनीतिक और आर्थिक फायदे के लिए भी बड़ी संख्या में दिए जाते थे। लेकिन जिस तरह से छत्तीसगढ़ की तीन जमीन से जुड़ी हस्तियों को पद्मश्री देने का ऐलान हुआ है वैसे ही इमानदारी देश भर के अन्य चुनिंदा हस्तियों के साथ की जारी है।

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