मानसून की हल्की बारिश और ठंडी हवाओं के बीच अपने डॉग के साथ वॉक पर जाने का मजा ही अलग होता है। कई डॉग्स को बारिश की बूंदों में दौड़ना और पानी के आसपास खेलना भी काफी पसंद होता है। हालांकि, यह खुशनुमा मौसम आपके पेट की सेहत के लिए कुछ परेशानियां भी लेकर आ सकता है।
लगातार बारिश, सड़कों पर जमा पानी, कीचड़ और वातावरण में बढ़ी नमी के कारण बैक्टीरिया, फंगस और परजीवियों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में मानसून के दौरान डॉग को वॉक पर ले जाते समय थोड़ी अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है। आइए जानते हैं बारिश के मौसम में डॉग वॉक के दौरान किन 5 बातों का ध्यान रखना चाहिए।
1. वॉक के लिए सही समय और सुरक्षित रास्ता चुनें
बारिश के मौसम में डॉग को वॉक पर ले जाते समय साफ और सुरक्षित रास्ते का चयन करें। कई डॉग्स को पानी में खेलना पसंद होता है, लेकिन सड़क या गड्ढों में जमा पानी उनके लिए सुरक्षित नहीं हो सकता।
ठहरे हुए पानी में बैक्टीरिया और अन्य हानिकारक सूक्ष्मजीव मौजूद हो सकते हैं। इसलिए डॉग को गंदे पानी, कीचड़ और जलभराव वाली जगहों से दूर रखने की कोशिश करें। तेज बारिश के दौरान वॉक पर जाने के बजाय हल्की बारिश या बारिश रुकने के बाद बाहर निकलना बेहतर हो सकता है।
2. वॉक के बाद पंजों और फर को अच्छी तरह साफ करें
मानसून में वॉक के दौरान डॉग के पंजों और फर पर कीचड़ और गंदगी आसानी से चिपक सकती है। इसके साथ कई तरह के बैक्टीरिया और फंगस भी घर तक पहुंच सकते हैं।
वॉक से वापस आने के बाद डॉग के पंजों, पैरों और शरीर को साफ कपड़े या पेट-सेफ वाइप्स से साफ करें। अगर फर गीला है तो उसे अच्छी तरह सुखाना भी जरूरी है। पंजों के बीच लंबे समय तक नमी रहने से फंगल और बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
3. टिक, पिस्सू और माइट्स की नियमित जांच करें
बारिश और नमी के मौसम में टिक, पिस्सू और माइट्स की समस्या बढ़ सकती है। ये छोटे परजीवी डॉग्स में कई गंभीर बीमारियों और त्वचा संबंधी परेशानियों का कारण बन सकते हैं।
हर वॉक के बाद डॉग के कान, गर्दन, बगल और पंजों की उंगलियों के बीच अच्छी तरह जांच करें। फर को धीरे-धीरे हटाकर देखें कि कहीं टिक या दूसरे परजीवी तो नहीं चिपके हैं। जरूरत पड़ने पर पशु चिकित्सक की सलाह से उचित टिक और फ्ली प्रिवेंशन ट्रीटमेंट अपनाएं।
4. स्किन एलर्जी और संक्रमण के संकेतों को नजरअंदाज न करें
मानसून में बढ़ी हुई नमी के कारण डॉग्स में त्वचा से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं। खुजली, लाल चकत्ते, रैशेज, कान में जलन या बार-बार पंजे चाटना किसी त्वचा संबंधी समस्या का संकेत हो सकता है।
डॉग के व्यवहार में होने वाले छोटे बदलावों पर भी नजर रखें। अगर वह लगातार किसी हिस्से को खुजा रहा है या उसकी त्वचा पर लालिमा दिखाई दे रही है तो समस्या को नजरअंदाज न करें। लक्षण बने रहने या बढ़ने पर पशु चिकित्सक से सलाह लेना बेहतर है।
5. पौष्टिक खाना और साफ-सफाई का रखें ध्यान
बारिश के मौसम में डॉग की बाहरी देखभाल के साथ उसके खान-पान पर ध्यान देना भी जरूरी है। संतुलित और पौष्टिक आहार डॉग की त्वचा और फर को स्वस्थ बनाए रखने के साथ उसकी सामान्य सेहत को सपोर्ट करता है।
डॉग को ताजा भोजन और साफ पीने का पानी दें। खाने और पानी के बर्तनों को नियमित रूप से साफ करें, क्योंकि मानसून की नमी में उनमें बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनप सकते हैं।
थोड़ी सावधानी से मानसून में भी खुश रहेगा आपका डॉग
मानसून में डॉग के साथ वॉक का आनंद जरूर लें, लेकिन सुरक्षित रास्ता चुनना, गंदे पानी से बचाना और वॉक के बाद पंजों व फर की सफाई करना न भूलें।
इसके साथ ही टिक, पिस्सू और त्वचा संबंधी समस्याओं के शुरुआती संकेतों पर नजर रखें। थोड़ी सी अतिरिक्त देखभाल आपके डॉग को पूरे बारिश के मौसम में स्वस्थ, सुरक्षित और खुश रखने में मदद कर सकती है।