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मंत्रियों को गौर गोपाल दास की सीख-:नेता हमेशा याद रखें कि वे संवेदनशील मनुष्यों का नेतृत्व करते हैं, न कि मशीनों का…

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सुशासन को केवल तकनीक से नहीं, बल्कि संवेदनशील नेतृत्व से मजबूत बनाया जा सकता है। यह संदेश शनिवार को नवा रायपुर स्थित आईआईएम में आयोजित चिंतन शिविर 3.0 में आध्यात्मिक चिंतक गौर गोपाल दास ने सीएम विष्णुदेव साय और मंत्रिपरिषद को दिया।

उन्होंने कहा कि नेताओं को हमेशा याद रखना चाहिए कि वे संवेदनशील मनुष्यों का नेतृत्व करते हैं, मशीनों का नहीं। इसलिए हर निर्णय में मानवीय संवेदना, सेवा-भाव और नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

चिंतन शिविर के पहले दिन नेतृत्व विकास सत्र में उन्होंने कहा कि प्रभावी नेतृत्व का आधार अधिकार नहीं, बल्कि विश्वास, करुणा और जिम्मेदारी है।

किसी भी नेता की सफलता इससे तय होती है कि वो लोगों को कितना समझते हैं।

उनकी बात कितनी गंभीरता से सुनते हैं और कठिन परिस्थितियों में कितना संतुलित निर्णय लेते हैं। उन्होंने भावनात्मक संतुलन, सकारात्मक सोच और सेवा-भाव को बेहतर प्रशासन की अनिवार्य शर्त बताते हुए कहा कि नेतृत्व का उद्देश्य लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना होना चाहिए। चिंतन शिविर 3.0 के प्रथम दिवस में नेतृत्व विकास, सुशासन, उभरती प्रौद्योगिकियों तथा कृषि समृद्धि जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत सत्र आयोजित किए गए।

एआई से खेती तक… चिंतन शिविर में विकसित छत्तीसगढ़ का भविष्य गढ़ने पर मंथन चिंतन शिविर 3.0 में नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने एआई, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, 5जी, ड्रोन, ब्लॉकचेन और डेटा आधारित प्रशासन के जरिए शासन को अधिक पारदर्शी, दक्ष और नागरिक-केंद्रित बनाने की संभावनाएं बताईं।

उन्होंने तकनीक आधारित सेवा वितरण, नवाचार, रोजगार सृजन और डिजिटल समावेशन पर जोर दिया। वहीं, ‘कृषि से समृद्धि’ सत्र में कृषि अर्थशास्त्री डॉ. रमेश चंद और कृषि विशेषज्ञ टी. विजय कुमार ने प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण, मूल्य संवर्धन, बाजार संपर्क और जलवायु अनुकूल कृषि के मॉडल साझा किए। मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भी समूह चर्चा में भाग लेकर सुझाव दिए।

योग से होगी शुरुआत, पर्यटन, सुशासन और नेतृत्व पर विशेषज्ञ देंगे मंत्र : चिंतन शिविर के दूसरे दिन की शुरुआत योग सत्र से होगी। इसके बाद विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ मंत्रिपरिषद के साथ अपने अनुभव साझा करेंगे। सुमन बिल्ला पर्यटन एवं सेवा क्षेत्र में संभावनाओं पर चर्चा करेंगे, जबकि शशांक मणि त्रिपाठी सार्वजनिक नीति और विकास के विषय पर संबोधित करेंगे।

ओलंपिक पदक विजेता गगन नारंग उत्कृष्टता और नेतृत्व की संस्कृति पर अपने विचार रखेंगे। वहीं, डॉ. विनय सहस्रबुद्धे सुशासन और जन केंद्रित प्रशासन के प्रभावी मॉडल प्रस्तुत करेंगे।

शिविर से अगली रूपरेखा बनेगी: साय सीएम साय ने कहा कि शिविर का उद्देश्य शासन को अधिक प्रभावी, आधुनिक, पारदर्शी और जनहितैषी बनाते हुए विकसित छत्तीसगढ़ के लिए दूरदर्शी नीति-निर्माण की मजबूत आधारशिला बनाना है। शिविर शासन की कार्यसंस्कृति में सुधार-नवाचार का माध्यम बन चुका है। हम इससे अगले चरण की रूपरेखा बनाएंगे।

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