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अबूझमाड़ से महाराष्ट्र तक फैला तस्करों का जाल : बाघ के आधा दर्जन और शिकारी पकड़े गए, सिर भी जब्त

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रायपुर – छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की सरहद पर सक्रिय बाघ की खाल और अंगों की तस्करी करने वाले एक अंतरराज्यीय रैकेट का एंटी पोचिंग स्क्वाड ने बड़ा भंडाफोड़ किया है। इंद्रावती ‘टाइगर रिजर्व में बाघ की खाल के साथ गिरफ्तार हुए दो पुलिसकर्मियों से मिली कड़ी के बाद संयुक्त टीम ने अबूझमाड़ और महाराष्ट्र सीमा पर छापामार कार्रवाई कर करीब आधा दर्जन तस्करों व शिकारियों को दबोच लिया है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, इस कार्रवाई में अब तक करीब एक दर्जन लोग पकड़े जा चुके हैं और एक तस्कर के कब्जे से बाघ की मुंडी भी जब्त की गई है। आशंका जताई जा रही है कि, इस गिरोह ने इलाके में चार से ज्यादा बाघों का शिकार किया है।

डेढ़ दशक में 25 खालें
जब्त, कांकेर बस्तर ‘हॉटस्पॉट’: वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो एनटीसीए और वन विभाग के रिकॉर्ड गवाही दे रहे हैं कि छत्तीसगढ़ में पिछले डेढ़ दशक में बाघों का बड़े पैमाने पर संहार हुआ है। साल 2010 से लेकर अब तक राज्य में बाघों के शिकार, खाल और अंगों की तस्करी के करीब 40 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से 25 मामलों में सीधे बाघों की खाल जब्त की गई है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि, इन कुल मामलों में से 80 प्रतिशत से ज्यादा प्रकरण अकेले कांकेर जिले और उसके नीचे के बस्तर रिजन में दर्ज हुए हैं, जो साबित करता है कि यह पूरा इलाका तस्करों का मुख्य केंद्र बन चुका है।

नक्सलियों के पूर्व मददगार अब बने तस्करों के ‘कुरियर ब्वाय’
इस पूरे मामले में एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। राज्य में जनवरी से नक्सलवाद के खात्मे की शुरुआत के बाद एक नया ट्रेंड देखा जा रहा है। पूर्व में जो लोग बस्तर के अंदरूनी इलाकों में नक्सलियों के मददगार (लोकल नेटवर्क) के रूप में काम करते थे, वे अब आत्मसमर्पण या नक्सली बैकफुट के बाद इस अंतरराष्ट्रीय शिकारी रैकेट के कुरियर ब्वाय’ बन गए हैं। अंदरूनी रास्तों और जंगलों की सटीक भौगोलिक जानकारी होने के कारण ये लोग वन विभाग की नजरों से बचकर खाल और अंगों को बार्डर पार कराने में तस्करों की मदद कर रहे हैं।

करोड़ों में बिकते हैं बेजुबानों के अंग
सूत्रों के अनुसार, बाघ और तेंदुओं (खाल और हड्डियां) अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक बाघ की खाल 15 लाख से 50 लाख तक में बिकती है। वहीं, इसकी हड्डियों की कीमत 3 लाख से 5 लाख रुपए प्रति किलो है। चीनी पारंपरिक दवाओं में बाघ की हड्डियों का इस्तेमाल ‘दर्द निवारक’ और ‘मर्दाना ताकत’ बढ़ाने के अंधविश्वास में किया जाता है। इनके नाखून और दांत 10,000 से 50,000 में ‘बुरी नजर’ से बचने के लॉकेट के रूप में बिकते हैं। शिकारी भालू को मारकर उसका पित्ताशय (गॉल ब्लैडर) निकाल लेते हैं, जो 1 लाख से 3 लाख में बिकता है। 

पैंगोलिन और हाथी का शिकार
इसमें पाए जाने वाले ‘उर्बोडॉक्सीकोलिक एसिड’ का इस्तेमाल चीन में कैंसर और लीवर की महंगी दवाएं बनाने में होता है। पैंगोलिन दुनिया में सबसे ज्यादा तस्करी का शिकार होने वाले इस जीव के शल्क 50,000 से 1 लाख रुपये प्रति किलो तक बिकते हैं। अंधविश्वास है कि इसके शल्क से तांत्रिक कवच और कामोत्तेजक दवाएं बनती हैं। सरगुजा और धरमजयगढ़ बेल्ट में हाथी दांत की तस्करी के लिए – हाथी निशाना बजते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाथी दांत 2 लाख से 4 लाख प्रति किलो तक बिकता है, जिससे चीन और जापान में स्टेटस सिंबल की मूर्तियां और मुहरें (हांको) बनाई जाती हैं।

आंकड़ों में शिकार

  • कांकेर जिलाः तस्करों का सबसे बड़ा गढ़। 
  • 30 नवंबर 2014: 2 बाघों की खाल जब्त। 
  • 18 दिसंबर 2014: 1 बाघ की खाल जब्त। 
  • 06 जनवरी 2015: दोबारा एक साथ 2 बाघों की खालें बरामद। 
  • 21 अप्रैल 2016: 1 बाघ की खाल जब्त। 
  • 08 दिसम्बर 2019: 1 बाघ की खाल जब्त।
  • अन्य जिलों की स्थिति (करंट और शिकार): राजनांदगांवः 24 सितंबर 2011 को उग्र भीड़ ने एक बाघ को मार डाला, जबकि 23 नवंबर 2016 को यहां से 1 खाल जब्त हुई।
  • सूरजपुर/अंबिकापुर: 18 अक्टूबर 2022 को 1 खाल मिली और 12 दिसंबर 2025 को 1 बाघ का शव शिकारियों के फंदे में मिला।
  • गोमर्डा (सारंगढ़-बिलाईगढ़): 24 जनवरी 2024 को शिकारियों द्वारा बिछाए गए करंट की चपेट में आने से 1 बाघ की तड़पकर मौत हो गई।
  • धमतरी और बिलासपुरः 2021 और 2010 में 1-1 बाघ की खाल बरामद की गई। 
  • कोरिया और लोरमीः कोरिया में 2024 में अज्ञात कारणों से मौत हुई, जबकि लोरमी में 2021 में एक शावक की प्राकृतिक मौत दर्ज की गई।

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