बिलासपुर। भिलाई नगर विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित विधायक देवेंद्र यादव को उनकी चुनाव याचिका से जुड़े मामले में हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उस आवेदन को अस्वीकार कर दिया है, जिसमें उन्होंने याचिका के दो बिंदुओं पर पहले फैसला सुनाने और विस्तृत साक्ष्य प्रक्रिया से पहले ही मामले का निपटारा करने की मांग की थी।
न्यायमूर्ति राकेश मोहन पाण्डेय की एकलपीठ ने 30 जून 2026 को पारित आदेश में कहा कि जिन प्रश्नों का संबंध विवादित तथ्यों और साक्ष्यों से है, उन्हें प्रारंभिक मुद्दा मानकर अलग से तय नहीं किया जा सकता। ऐसे मामलों में पूर्ण सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही निर्णय संभव है।
चुनाव परिणाम को दी गई है चुनौती
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडे ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की विभिन्न धाराओं के तहत चुनाव याचिका दायर कर भिलाई नगर सीट से देवेंद्र यादव के निर्वाचन को चुनौती दी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनावी शपथपत्र में सोशल मीडिया खातों, आय, संपत्ति और लंबित आपराधिक मामलों से संबंधित आवश्यक जानकारियां पूरी तरह उजागर नहीं की गईं। मामले में दोनों पक्षों की दलीलों के बाद अदालत ने अगस्त 2024 में पांच मुद्दे निर्धारित किए थे। इससे पहले देवेंद्र यादव की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को भी सुप्रीम कोर्ट फरवरी 2026 में खारिज कर चुका है और उन्हें हाईकोर्ट में चुनाव याचिका का सामना करने के निर्देश दिए थे।
प्रारंभिक मुद्दों पर पहले फैसले की मांग
विधायक देवेंद्र यादव की ओर से अधिवक्ताओं ने आवेदन प्रस्तुत कर अदालत से अनुरोध किया था कि मुद्दा क्रमांक 2 और 4 को प्रारंभिक मुद्दे के रूप में तय कर पहले उन पर निर्णय दिया जाए। उनका पक्ष था कि नामांकन और शपथपत्र में सभी आवश्यक विवरण प्रस्तुत किए गए थे, इसलिए इन बिंदुओं पर बिना साक्ष्य दर्ज किए भी फैसला संभव है।
याचिकाकर्ता ने किया विरोध
प्रेम प्रकाश पांडे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. एन.के. शुक्ला और अधिवक्ता देवाशीष तिवारी ने इस मांग का विरोध करते हुए कहा कि विवादित प्रश्नों का संबंध तथ्यों से है, जिनका प्रतिवादी द्वारा खंडन किया गया है। ऐसे में साक्ष्य और गवाहों के परीक्षण के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना न्यायसंगत नहीं होगा।
अदालत की अहम टिप्पणी
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि प्रारंभिक मुद्दों पर फैसला तभी दिया जा सकता है, जब मामला केवल विधिक प्रश्न तक सीमित हो या तथ्यों को लेकर कोई विवाद न हो। लेकिन यदि किसी पक्ष द्वारा तथ्यों पर आपत्ति जताई गई हो और साक्ष्यों के मूल्यांकन की आवश्यकता हो, तो नियमित सुनवाई आवश्यक हो जाती है।
4 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
अदालत ने कहा कि यह जांचना कि क्या किसी प्रत्याशी ने जानकारी छिपाई, क्या चुनावी कानून का उल्लंघन हुआ, क्या किसी प्रकार का भ्रष्ट आचरण या चुनावी अपराध हुआ तथा उसका चुनाव परिणाम पर क्या प्रभाव पड़ा- ये सभी तथ्यात्मक प्रश्न हैं, जिनका निर्धारण साक्ष्यों के आधार पर ही किया जा सकता है। हाईकोर्ट द्वारा आवेदन खारिज किए जाने के बाद अब चुनाव याचिका की अगली सुनवाई 4 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है।