आरंग। मंदिर हसौद स्थित नवनिर्मित तहसील कार्यालय भवन का शनिवार 11 जुलाई को वरिष्ठ नेता बृजमोहन अग्रवाल के हाथों लोकार्पण किया गया। हालांकि उद्घाटन कार्यक्रम से ज्यादा इसकी तैयारियों और आयोजन के दौरान हुए घटनाक्रम ने लोगों का ध्यान खींचा। कार्यक्रम से पहले निमंत्रण पत्रों में लगातार बदलाव और प्रमुख मंत्रियों की अनुपस्थिति को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
तीन बार बदले निमंत्रण पत्र, बढ़ी चर्चाएं
इस आयोजन को लेकर अलग-अलग तीन निमंत्रण पत्र जारी किए गए। शुरुआती दो कार्डों में कैबिनेट मंत्री टंकराम वर्मा को मुख्य अतिथि और गुरु खुशवंत साहेब को अध्यक्ष बनाया गया था, जबकि वरिष्ठ नेता बृजमोहन अग्रवाल का नाम शामिल नहीं था। बाद में जिला प्रशासन की ओर से नया निमंत्रण पत्र जारी किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि और अध्यक्ष के उल्लेख को हटाकर केवल शुभारंभ कार्यक्रम के रूप में बृजमोहन अग्रवाल का नाम प्रमुखता से जोड़ा गया। एक ही कार्यक्रम के लिए बार-बार निमंत्रण पत्र बदलने से प्रशासनिक समन्वय पर सवाल उठ रहे हैं।
मंत्रियों की गैरहाजिरी बनी चर्चा का विषय
जिन मंत्रियों के नाम पहले जारी निमंत्रण पत्रों में प्रमुख रूप से दर्ज थे, वे कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। उनकी अनुपस्थिति को लेकर राजनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि किसी भी पक्ष की ओर से इस संबंध में आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
भवन की गुणवत्ता पर पहले से उठ रहे हैं सवाल
करीब 74 लाख रुपये की लागत से बने इस तहसील भवन की गुणवत्ता को लेकर उद्घाटन से पहले ही सवाल उठ चुके थे। मीडिया रिपोर्टों में भवन की दीवारों और निर्माण कार्य में दरारें आने का दावा किया गया था। इसके बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता और जिम्मेदार एजेंसियों की कार्यप्रणाली को लेकर भी चर्चा तेज हो गई।
जनता के बीच उठ रहे कई सवाल
लोकार्पण तो हो गया, लेकिन निमंत्रण पत्रों में बदलाव, मंत्रियों की अनुपस्थिति और भवन की गुणवत्ता को लेकर उठे सवाल अब भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। लोगों की नजर अब इस बात पर है कि संबंधित विभाग इन मुद्दों पर क्या स्पष्टीकरण देता है और निर्माण गुणवत्ता को लेकर आगे क्या कार्रवाई होती है।