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रूठा मानसून : कृषि पंप चलने से बिजली की खपत आसमान पर, तीन संयंत्र भी बंद

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रायपुर। मानसून के मौसम में बारिश न होने के कारण कृषि पंप लगातार चल रहे हैं, इसके कारण बिजली की खपत आसमान पर चली गई है। उमस और गर्मी के कारण एसी और कूलर भी लगातार चल रहे हैं। ऐसे में बिजली की डिमांड छह हजार मेगावाट से ज्यादा है। इस समय कोरबा में बिजली के तीन संयंत्र भी बंद होने के कारण छत्तीसगढ़ राज्य उत्पादन कंपनी का अपना उत्पादन दो हजार मेगावाट से भी कम हो रहा है। चार हजार से ज्यादा बिजली सेंट्रल सेक्टर से लेने की जरूरत पड़ रही है। भरी गर्मी में पॉवर कंपनी के संयंत्र लगातार बंद रहे हैं।

मानसून में बारिश का टोटा होने के कारण किसानों को बहुत परेशानी हो रही है। ऐसे में प्रदेश भर के किसानों को अपने कृषि पंपों का सहारा लेना पड़ा है। प्रदेश में सात लाख से ज्यादा स्थाई और अस्थाई कृषि पंप लगातार चल रहे हैं। कृषि पंपों के चलने के कारण बिजली की खपत ज्यादा हो रही है। कृषि पंपों पर ही रोज छह से सात सौ मेगावाट बिजली लग जाती है। इसी के साथ उद्योगों में भी रोज सात से आठ सौ मेगावाट बिजली लगती है। बाकी बिजली की खपत आम उपभोक्ता करते हैं।

अपना उत्पादन कम
छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर उत्पादन कंपनी के बिजली संयंत्रों की क्षमता 2960 मेगावाट है, लेकिन कभी भी उत्पादन परा नहीं होता है। हमेशा से ही 25 से 26 सौ मेगावाट उत्पादन या फिर संयंत्र खराब होने पर दो हजार मेगावाट से भी कम उत्पादन होता है। इस समय भी तीन संयंत्र बंद है। डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ताप संयंत्र के 250 मेगावाट के दोनों संयंत्र बंद हो गए हैं। इसी के साथ कोरबा वेस्ट में 210 मेगावाट का भी एक संयंत्र बंद है। कोरबा वेस्ट में तो 210 मेगावाट के दो संयंत्र भरी गर्मी में एक माह से भी ज्यादा समय तक बंद रहे हैं। इस समय पॉवर कंपनी का अपने संयंत्रों में उत्पादन 1850 मेगावाट के आस-पास हो रहा है। प्रदेश के अन्य संयंत्रों से करीब 150 मेगावाट बिजली मिलने से दो हजार मेगावाट बिजली हो रही है। खपत छह हजार मेगावाट के पार होने पर सेंट्रल सेक्टर से चार हजार मेगावाट से लेकर 42 सौ मेगावाट तक बिजली लेने की जरूरत पड़ रही है।

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