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नहीं मिल रहा आयुष्मान का वरदान : प्राइवेट ही नहीं सरकारी अस्पतालों के भी करोड़ों अटके

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रायपुर – आयुष्मान स्वास्थ्य सहायता योजना में मरीजों का निशुल्क इलाज करने वाले प्राइवेट ही नहीं, सरकारी अस्पतालों का भी करोड़ों रुपए का भुगतान अटका हुआ है। स्वास्थ्य योजना के 90 फीसदी हितग्राहियों के इलाज का सहारा यही सरकारी हास्पिटल हैं। अस्पताल मिलने वाली इस राशि की मदद से उपचार संबंधी संसाधनों की व्यवस्था करता है। इनमें आंबेडकर अस्पताल के साथ एम्स जैसे बड़े स्वास्थ्य संस्थानों में बकाया सौ करोड़ के आसपास हो चुका है।

राज्य की 95 फीसदी आबादी स्वास्थ्य सहायता आयुष्मान योजना की हितग्राही है। स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति होने पर इसी आयुष्मान कार्ड का भरोसा करता है। हितग्राहियों को मिलने वाले इलाज के बदले स्वास्थ्य विभाग इन अस्पतालों को निर्धारित पैकेज के आधार पर राशि का भुगतान करती है। अस्पतालों को इलाज के बदले दी जाने वाली राशि के नियमित होने की शिकायत अक्सर सामने आती है। प्राइवेट ही नहीं सरकारी अस्पताल भी इस पेडिंग भुगतान की समस्या से पीड़ित है।

राजधानी के बड़े सरकारी अस्पतालों में आयुष्मान योजना का संकट
जानकार सूत्रों का दावा है कि,  राजधानी में बड़े शासकीय संस्थान के रूप में पहचाने जाने वाले अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के करीब 120 करोड़ रुपए आयुष्मान स्वास्थ्य योजना के बकाया है। इसी तरह आंबेडकर अस्पताल के पेडिंग एमाउंट की राशि भी 100 करोड़ से ऊपर जा चुकी है। डीके सुपरस्पेशलिटी हास्पिटल को भी इस निशुल्क स्वास्थ्य सहायता योजना के हितग्राहियों का इलाज करने के बदले मिलने वाली करीब 38 करोड़ की राशि का इंतजार कर रही है। आयुष्मान के मरीजों के इलाज के बदले मिलने वाली इस राशि के कुछ हिस्से का उपयोग अस्पताल में जरुरी संसाधन जुटाने में किया जाता है। इसके अलावा डाक्टरों सहित अन्य स्टाफ को दिए जाने वाले इंटेसिव सहित अन्य कार्यों में इसका उपयोग होता है।

निजी हास्पिटलों का भी करीब 500 करोड़
इधर,  निजी हास्पिटलों से जुड़े सूत्रों का दावा है कि अस्पतालों को जनवरी माह से भुगतान नहीं हुआ है। राज्य में प्रायवेट अस्पतालों की पेडिंग अमाउंट भी करीब पांच सौ करोड़ तक पहुंच चुकी है। राशि नहीं मिलने की वजह से मध्यम और छोटे अस्पतालों को ज्यादा दिक्कत उठानी पड़ती है। अस्पतालों को भुगतान के लिए समय-समय पर निजी अस्पतालों को अक्सर दबाव बनाना पडता है।

इंटेंसिव पर नहीं बनी बात
ज्यादा से ज्यादा आयुष्मान हितग्राही मरीजों का इलाज करने के लिए विभागीय स्तर पर शासकीय अस्पतालों में पदस्थ डाक्टर, नर्सिंग स्टाफ सहित विभिन्न कर्मचारियों को आयुष्मान राशि का कुछ हिस्सा इंटेंसिव के रूप में दिया जाता है। अस्पताल के सर्जनों को प्रोत्साहन के रूप में मिलने वाली बड़ी राशि और निचले स्तर के स्वास्थ्य केंद्रों में हुए बंदरबाट की शिकायतों के बाद इसे बंद कर दिया गया।

एक नजर में आयुष्मान स्वास्थ्य योजना

  • राशनकार्ड के 2.45 करोड़ से ज्यादा आयुष्मान कार्डधारक
  • एपीएल कार्डधारकों को 50 हजार, बीपीएल परिवार को 5 लाख तक निशुल्क उपचार
  • राज्य के तमाम 1037 शासकीय एवं 568 निजी हास्पिटल योजना में पंजीकृत

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