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RBI फिर लाएगा प्लास्टिक नोट! ₹10 और ₹20 से शुरू हो सकता है ट्रायल, नकली नोटों और छपाई खर्च पर लगेगी लगाम

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देश में डिजिटल भुगतान तेजी से बढ़ने के बावजूद नकदी की मांग लगातार बनी हुई है। इसी बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) एक बार फिर पॉलीमर (प्लास्टिक) बैंकनोट लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। पिछले 16 वर्षों में यह इस तरह का तीसरा प्रयास होगा। इस बार बदली हुई रणनीति और तकनीकी तैयारियों के चलते इस परियोजना के सफल होने की संभावना अधिक मानी जा रही है।

क्या होते हैं पॉलीमर बैंकनोट?

पॉलीमर बैंकनोट पारंपरिक कॉटन-आधारित कागज की बजाय विशेष प्लास्टिक सब्सट्रेट से तैयार किए जाते हैं। ये नोट सामान्य कागजी नोटों की तरह हल्के और लचीले होते हैं तथा आसानी से मोड़े जा सकते हैं।

इनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये सामान्य नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ होते हैं और लंबे समय तक उपयोग में रह सकते हैं।

क्यों बढ़ रही है प्लास्टिक नोटों की जरूरत?

RBI की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में बैंकनोटों की छपाई पर लगभग 6,372.8 करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि पिछले वर्ष यह खर्च 5,101.4 करोड़ रुपये था।

इसके अलावा बड़ी संख्या में पुराने और खराब हो चुके नोटों को हर साल चलन से हटाकर नष्ट करना पड़ता है। खासकर ₹10 और ₹20 जैसे छोटे मूल्यवर्ग के नोट बार-बार उपयोग के कारण जल्दी खराब हो जाते हैं।

RBI का मानना है कि पॉलीमर नोटों के उपयोग से:

  • नोटों की उम्र बढ़ेगी।
  • छपाई और रिप्लेसमेंट की लागत कम होगी।
  • खराब नोटों की संख्या घटेगी।

नकली नोटों पर भी लगेगी लगाम

प्रस्तावित पॉलीमर नोटों में कई आधुनिक सुरक्षा फीचर्स शामिल किए जा सकते हैं, जैसे—

  • पारदर्शी विंडो (Transparent Window)
  • माइक्रो-ऑप्टिक सुरक्षा तत्व
  • विशेष होलोग्राम
  • एडवांस सिक्योरिटी इंक

इन तकनीकों का उद्देश्य नकली नोटों की पहचान आसान बनाना और जालसाजी की संभावनाओं को कम करना है।

पहले क्यों नहीं हो सका था सफल प्रयोग?

भारत में पॉलीमर नोटों की पहल पहली बार 2010 में शुरू हुई थी। इसके बाद 2017 में सरकार ने ₹10 के पॉलीमर नोटों का सीमित फील्ड ट्रायल करने की मंजूरी भी दी थी।

हालांकि, उस समय कई तकनीकी और परिचालन संबंधी चुनौतियां सामने आई थीं। अधिकांश एटीएम, कैश डिपॉजिट मशीनें और नोट गिनने वाली मशीनें कागजी नोटों के अनुरूप बनी थीं, जिनमें पॉलीमर नोटों के उपयोग के लिए बड़े स्तर पर बदलाव की आवश्यकता थी। इसके अलावा पॉलीमर शीट का आयात भी लागत बढ़ा रहा था।

इस बार बदली है रणनीति

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बार RBI केवल पॉलीमर शीट आयात करने पर निर्भर नहीं रहना चाहता। केंद्रीय बैंक देश के भीतर ही पॉलीमर शीट के निर्माण की संभावनाओं पर काम कर रहा है, जिससे उत्पादन लागत कम हो सकती है।

साथ ही बैंकिंग मशीनों और एटीएम को भी नई तकनीक के अनुरूप अपग्रेड करने की तैयारी की जा रही है।

₹10 और ₹20 के नोटों से हो सकती है शुरुआत

जानकारी के अनुसार, यदि पायलट परियोजना को मंजूरी मिलती है तो सबसे पहले ₹10 और ₹20 के पॉलीमर नोटों का परीक्षण किया जा सकता है। परीक्षण सफल रहने पर इन्हें चरणबद्ध तरीके से देशभर में लागू करने पर विचार किया जाएगा।

दुनिया के 60 से अधिक देशों, जिनमें ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, कनाडा और सिंगापुर शामिल हैं, में पॉलीमर बैंकनोट पहले से प्रचलन में हैं।

नोट: फिलहाल RBI की ओर से देशभर में पॉलीमर नोटों के पूर्ण रूप से लागू किए जाने की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। यह जानकारी प्रस्तावित पायलट परियोजना और उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित है।

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