जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने पुंछ और राजौरी जिलों में भारी तबाही मचाई है। अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोगों के लापता होने की खबर है। हालात को देखते हुए राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया गया है। मौसम विभाग ने भी आने वाले दिनों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
पुंछ में सबसे ज्यादा नुकसान
अधिकारियों के मुताबिक सबसे अधिक प्रभावित इलाका सुरनकोट तहसील रहा। नूनबंदी गांव में एक मकान ढहने से 28 वर्षीय नाजिया कौसर की मौत हो गई, जबकि उनके पति और तीन छोटे बच्चे घायल हो गए। सभी घायलों का अस्पताल में इलाज जारी है।
वहीं लोअर मुर्राह क्षेत्र में भूस्खलन के बाद मोहम्मद लतीफ और उनके परिवार के पांच सदस्य लापता बताए जा रहे हैं। प्रशासन और बचाव दल उनकी तलाश में जुटे हैं।
इसके अलावा मरहोट इलाके में एक बच्ची की नाले में डूबने से मौत हो गई, जबकि धुंदक लाठोंग पुल के पास एक अज्ञात महिला का शव बरामद किया गया है।
उमर अब्दुल्ला ने बीच में छोड़ा दिल्ली दौरा
बिगड़ते हालात को देखते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपना दिल्ली दौरा रद्द कर तुरंत जम्मू लौटने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों की लगातार निगरानी की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर पार्टी का पूर्व निर्धारित कार्यक्रम तय समय पर जारी रहेगा।
राजौरी में बाढ़ जैसे हालात
राजौरी जिले में भी लगातार बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। बेला न्यू बस स्टैंड क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ, जहां पानी भरने से कई वाहन बह गए या डूब गए।
दरहाली, खंडली, सुकतोह और जामौला नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। दरहाली नदी का सुरक्षा तटबंध टूटने के बाद आसपास के रिहायशी इलाकों में पानी घुस गया, जिससे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
23 जुलाई तक भारी बारिश का अलर्ट
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जम्मू-कश्मीर में 23 जुलाई तक मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग ने भूस्खलन, फ्लैश फ्लड और जलभराव की आशंका को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें, नदियों और नालों के आसपास न जाएं तथा स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। आपदा प्रबंधन और राहत टीमें हाई अलर्ट पर तैनात हैं।