Meta Pixel

बिना आदेश हटाए गए कर्मचारी : आदिम जाति विकास विभाग में वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों की छंटनी पर बवाल, सीएम से लगाई गुहार

Spread the love

लोरमी। आदिम जाति विकास विभाग के अंतर्गत संचालित आश्रमों एवं छात्रावासों में वर्षों से कार्यरत मौखिक (अस्थायी) कर्मचारियों को बिना लिखित आदेश और विधिसम्मत प्रक्रिया अपनाए कार्य से अलग किए जाने का मामला सामने आया है। इस संबंध में मुख्यमंत्री के नाम शिकायत भेजकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और प्रभावित कर्मचारियों को न्याय दिलाने की मांग की गई है।

वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों को हटाने और मानदेय रोकने का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि, वर्ष 2008, 2012 और 2015 से लगातार सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को अचानक कार्य से पृथक कर दिया गया और उनका मानदेय भी रोक दिया गया है। इससे कई परिवारों के सामने आजीविका का संकट उत्पन्न हो गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि, वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों को हटाकर नए लोगों से कार्य कराया जा रहा है।

नई नियुक्तियों में अनियमितता और आर्थिक लेन-देन की आशंका
शिकायत में नई नियुक्तियों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि, नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितता हुई है और अवैध आर्थिक लेन-देन की आशंका है। शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की किसी वरिष्ठ अधिकारी अथवा स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराने, नई नियुक्तियों से जुड़े अभिलेखों की जांच करने और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही जांच पूरी होने तक प्रभावित कर्मचारियों को पुनः कार्य पर रखने और लंबित मानदेय का भुगतान करने का भी अनुरोध किया गया है।

विश्व आदिवासी दिवस पर पीड़ित कर्मचारियों से लिए जाएंगे आवेदन
इस संबंध में लोरमी आदिवासी समाज के अध्यक्ष गिरीश ध्रुव ने बताया कि, विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर पीड़ित कर्मचारियों से आवेदन लिए जाएंगे और उन्हें न्याय दिलाने और नियमानुसार पुनः नियुक्ति दिलाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि, पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की जाएगी। फिलहाल, इस मामले में संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *