मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के युवा किसान कार्तिकेय मंडलोई ने पारंपरिक खेती से अलग हटकर कृषि को व्यवसाय के रूप में अपनाया और सफलता की नई मिसाल कायम की। सरकारी नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने महज एक कमरे से मशरूम की खेती शुरू की।
करीब 21 लाख रुपये के निवेश से शुरू हुआ उनका यह कारोबार आगे बढ़कर करीब 55 लाख रुपये की कमाई तक पहुंच गया। कार्तिकेय ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ हुए कृषि नवाचार संवाद कार्यक्रम में अपनी सफलता की कहानी साझा की।
एक कमरे से शुरू किया सफर
कार्तिकेय ने सीमित जगह में मशरूम उत्पादन शुरू किया। उनका उद्देश्य कम जगह में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके बेहतर आमदनी हासिल करना था।
शुरुआत में निवेश करने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे अपने काम का विस्तार किया। उनकी कहानी यह दिखाती है कि कृषि व्यवसाय शुरू करने के लिए हमेशा बड़े खेत या बहुत ज्यादा जमीन की जरूरत नहीं होती। सही तकनीक, प्रशिक्षण और बाजार की समझ के जरिए छोटे स्तर से भी कारोबार खड़ा किया जा सकता है।
मशरूम के साथ कई कृषि गतिविधियों की ट्रेनिंग
मशरूम उत्पादन में सफलता मिलने के बाद कार्तिकेय ने अपने अनुभव को दूसरे किसानों के साथ साझा करना शुरू किया। अब वह किसानों को खेती से जुड़ी कई वैकल्पिक गतिविधियों की ट्रेनिंग दे रहे हैं।
इंदौर में उनके प्रशिक्षण कार्यक्रमों में मशरूम फार्मिंग, मेडिकल मशरूम, मोती की खेती, मधुमक्खी पालन और माइक्रो ग्रीन्स जैसी गतिविधियां शामिल हैं।
अब तक 50 से ज्यादा किसानों को मशरूम फार्मिंग और करीब 80 किसानों को पर्ल फार्मिंग की ट्रेनिंग दी जा चुकी है।
मोती की खेती से अतिरिक्त आमदनी का मौका
कार्तिकेय किसानों को मोती की खेती के बारे में भी प्रशिक्षण दे रहे हैं। सामान्य तौर पर मोती तैयार होने में करीब 8 से 9 महीने का समय लग सकता है।
इस तरह की गतिविधियों को किसान अपनी पारंपरिक खेती के साथ अतिरिक्त आमदनी के विकल्प के तौर पर अपना सकते हैं। प्रशिक्षण के जरिए किसानों को उत्पादन के साथ-साथ नए कृषि व्यवसाय की संभावनाओं की जानकारी भी दी जा रही है।
युवाओं के लिए प्रेरणा बनी कहानी
कार्तिकेय मंडलोई की कहानी उन युवाओं के लिए खास है, जो नौकरी के साथ-साथ अपना व्यवसाय शुरू करने के विकल्प तलाश रहे हैं।
उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़कर कृषि में प्रयोग किया और धीरे-धीरे इसे व्यवसाय का रूप दिया। उनकी सफलता से यह संदेश मिलता है कि खेती को आधुनिक तकनीक, नए विचार और बाजार की जरूरतों के साथ जोड़कर रोजगार और कमाई का बेहतर जरिया बनाया जा सकता है।
आज कार्तिकेय खुद कृषि व्यवसाय कर रहे हैं और साथ ही दूसरे किसानों को भी नई तकनीकों और वैकल्पिक कृषि गतिविधियों की ट्रेनिंग देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं।