Mulethi Health Benefits: मुलेठी का इस्तेमाल आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में लंबे समय से किया जाता रहा है। हल्के मीठे स्वाद वाली मुलेठी की जड़ को खासतौर पर गले में खराश, खांसी और आवाज बैठने जैसी परेशानियों में इस्तेमाल किया जाता है।
मुलेठी को चाय, काढ़े या सीमित मात्रा में चबाकर लिया जाता है। इसमें मौजूद कुछ प्राकृतिक यौगिकों के एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रभावों पर भी शोध हुआ है। हालांकि, इसे किसी बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए और इसका सेवन मात्रा व व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखकर करना जरूरी है।
गले की खराश में मिल सकती है राहत
मुलेठी का सबसे आम इस्तेमाल गले से जुड़ी परेशानियों के लिए किया जाता है। मुलेठी की जड़ चबाने या इसकी हल्की चाय का सेवन करने से कुछ लोगों को गले में जलन और खराश से अस्थायी राहत मिल सकती है।
मुलेठी में मौजूद कुछ यौगिक सूजन और जलन से जुड़े तंत्र पर असर डाल सकते हैं। हालांकि, अगर गले में दर्द लंबे समय तक बना रहे, तेज बुखार हो या संक्रमण के लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
खांसी में भी उपयोगी हो सकती है मुलेठी
पारंपरिक रूप से मुलेठी का इस्तेमाल खांसी और गले की परेशानी में किया जाता रहा है। इसका सेवन गले को शांत करने में मदद कर सकता है और कुछ लोगों को सूखी खांसी में राहत महसूस हो सकती है।
लेकिन लगातार या गंभीर खांसी के पीछे एलर्जी, संक्रमण या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या हो सकती है। ऐसे में सिर्फ मुलेठी पर निर्भर रहना सही नहीं है।
पाचन तंत्र के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है
मुलेठी का इस्तेमाल पेट से जुड़ी कुछ परेशानियों में भी किया जाता है। यह पेट की जलन, अपच और पाचन संबंधी असहजता में कुछ लोगों को राहत दे सकती है।
कुछ अध्ययनों में मुलेठी के पेट की अंदरूनी परत पर संभावित सुरक्षात्मक प्रभावों का भी अध्ययन किया गया है। हालांकि, बार-बार एसिडिटी, पेट दर्द या अपच की समस्या होने पर डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है।
सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस में मददगार हो सकती है
मुलेठी की जड़ में कई प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं। इनमें से कुछ के एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों का वैज्ञानिक अध्ययनों में परीक्षण किया गया है।
ये यौगिक शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन से जुड़े कुछ जैविक तंत्रों को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि मुलेठी हर प्रकार की सूजन या बीमारी का इलाज है।
मुंह और दांतों की देखभाल में भी इस्तेमाल
मुलेठी में मौजूद कुछ यौगिकों के संभावित एंटीमाइक्रोबियल प्रभावों पर भी शोध किया गया है। इसी कारण पारंपरिक रूप से मुलेठी को मुंह की स्वच्छता और दांतों की देखभाल से भी जोड़ा जाता है।
हालांकि, मुलेठी चबाना ब्रश करने और फ्लोराइड वाले टूथपेस्ट का विकल्प नहीं है। दांतों और मसूड़ों की समस्या होने पर डेंटिस्ट की सलाह लेना जरूरी है।
ज्यादा मुलेठी का सेवन हो सकता है नुकसानदायक
मुलेठी का सेवन हमेशा सीमित मात्रा में और सावधानी से करना चाहिए। इसमें मौजूद ग्लाइसिरिजिन (Glycyrrhizin) की अधिक मात्रा शरीर में पोटैशियम का स्तर कम कर सकती है और ब्लड प्रेशर बढ़ा सकती है।
बहुत ज्यादा या लंबे समय तक मुलेठी लेने से कुछ लोगों में:
- ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है
- शरीर में सूजन हो सकती है
- कमजोरी महसूस हो सकती है
- पोटैशियम का स्तर कम हो सकता है
- दिल की धड़कन से जुड़ी समस्या हो सकती है
इन लोगों को मुलेठी लेने से पहले डॉक्टर से पूछना चाहिए
हाई ब्लड प्रेशर, हृदय या किडनी की बीमारी से जूझ रहे लोगों को मुलेठी का सेवन बिना चिकित्सकीय सलाह के नहीं करना चाहिए।
गर्भवती महिलाओं को भी मुलेठी लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। इसके अलावा कुछ दवाओं के साथ मुलेठी की प्रतिक्रिया हो सकती है, इसलिए नियमित दवाएं लेने वाले लोगों को भी सावधानी बरतनी चाहिए।
जरूरी बात
मुलेठी सीमित मात्रा में कुछ सामान्य परेशानियों में राहत देने में मदद कर सकती है, लेकिन इसे किसी बीमारी की मुख्य दवा या इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। खासकर लंबे समय से चल रही खांसी, गले में दर्द, पेट की समस्या या अन्य लक्षणों में डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। यह किसी बीमारी के निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। मुलेठी का नियमित या लंबे समय तक सेवन करने से पहले, खासकर यदि आप किसी बीमारी से पीड़ित हैं या दवाएं लेते हैं, डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।