सरल शब्दों में जानिए छत्तीसगढ़ सरकार का पूरा बजट, आम जनता के हित में 22% ज्यादा राशि में बहुत कुछ पहली बार होगा…!

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कभी प्रदेश का बड़ा प्रशासनिक चेहरा रहे। फिर बीजेपी का बड़ा चेहरा बने। पिछली सियासी हार को जीत में पलटकर बाजीगर बने। मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री पद के लिए नाम चला। लेकिन मिल गई सूबे के खजाने की चाबी। वो चाबी, जिसके मिलते ही उन्होंने कहा कि खजाना तो पांच सालों में लुट गया है।

खाली खजाने की चाबी जेब में रखे, जब वे बजट पेश करने निकले, तो सियासत के पारंपरिक पहनावे से जुदा पैंट-शर्ट के साथ जैकेट में थे। राम मंदिर गए। मत्था टेका। तिलक लगाया। फिर सदन में रिमोट हाथ में लिए स्टेट का पहला डिजिटल बजट पेश किया।

ब्रीफकेस में अमृतकाल के नींव का बजट लिखा गया था।

छत्तीसगढ़ में दो महीने पहले सरकार में आई भाजपा सरकार की ओर से वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने 2024-25 के लिए विधानसभा में पिछले साल की तुलना में 22 फीसदी ज्यादा यानी 1 लाख 47 हजार 500 करोड़ रुपए का बजट पेश किया। पुरानी सरकार के किए-धरे पर पोंछा लगाते हुए नई सरकार ने विधानसभा चुनाव के दौरान किए अपने वादों को पूरा करने नई पेंटिंग कर डाली।

विधानसभा चुनाव में महिलाओं से वोटों के रूप में मिले आशीर्वाद को न भूलते हुए उसने उसे अपने फोकस में रखा। यही वजह है कि महिला एवं बाल विकास विभाग के बजट में नई सरकार में 100 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी कर दी। उसने गांव, गरीब, किसान और युवाओं पर से भी अपना ध्यान भटकने नहीं दिया। बजट बताता है कि सरकार को पता है कि मोदी की गारंटी पर उन्हें चुनने वालों को इस बार सीधे मोदी को चुनना है। लिहाजा सभी का ख्याल रखने में उसने खजाना खोलने में कंजूसी नहीं की है।

किसान
भूपेश बघेल की पांच साल की सरकार खुद को किसान का सबसे बड़ा हितैषी बताती रही थी। लिहाजा सत्ता में आने के बाद भाजपा ने उनका हाथ थाम रखा है। पहले बोनस और फिर वादे की कीमत पर धान खरीदी की गई। कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग के लिए बजट में 3365 करोड़ यानी 33 फीसदी बढ़ोतरी करते हुए 13435 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। वहीं दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर योजना के लिए 500 करोड़ का प्रावधान किया गया।

महिला
करीब दो महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में करीब 59 फीसदी सीटों पर महिला वोटर्स का वर्चस्व रहा। 90 में से 57 विधानसभा सीटें ऐसी थीं, जहां महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा है। पुरुषों की तुलना में पूरे प्रदेश में एक लाख 9 हजार 370 महिला वोटर ज्यादा हैं। कांग्रेस का तख्तापलट कर भाजपा को सत्ता में बिठाने में महिलाओं की बड़ी भूमिका रही।

अब दो महीने बाद लोकसभा चुनाव हैं। लिहाजा भाजपा ने अपने भगवा झंडे में महिलाओं का पल्लू बांध लिया है। प्रदेश के बजट का सबसे बड़ा हिस्सा महिला एवं बाल विकास विभाग को मिला है। 5683 करोड़ रुपए यानी 112 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ अब इस विभाग का बजट 2675 करोड़ रुपए कर दिया गया है।

गांव
गांवों को इंटरनेट कनेक्टिविटी से जोड़ने और वाई-फाई की सुविधा देने के अलावा यहां रहने वाले किसान, खेल और युवा, आम आदमी को सुविधा के साथ हायर एजुकेशन और स्वास्थ्य सुविधाओं को लिए सरकार ने खासतौर पर फोकस किया है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग का बजट 7200 करोड़ रुपए यानी 70 फीसदी बढ़ाते हुए 17529 करोड़ रुपए कर दिया गया है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग का बजट भी 2055 करोड़ यानी 37 फीसदी बढ़ाकर 7552 करोड़ रुपए कर दिया गया है।

शहरी विकास
पांच साल के दौरान भूपेश बघेल की सरकार हर गांव और शहर में ये आलोचना झेलती रही कि अधोसंरचना और शहरी विकास पर कोई काम नहीं हुआ। कोई मंत्री भी इन सवालों का जवाब पांच साल में ठीक से नहीं दे सका। ये तस्वीर एक बार फिर बदलने की कोशिश शुरू हुई है। नगरीय प्रशासन विकास विभाग के बजट में 13 फीसदी यानी 684 करोड़ बढ़ाकर इसे 6044 करोड़ रुपए कर दिया गया है। इसी तरह पीएम ग्राम सड़क योजना के लिए 841 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

पूरा होगा घर का सपना
पांच साल की कांग्रेस की सरकार के दौरान भाजपा हमेशा उस पर केंद्र की पीएम आवास योजना के तहत बनाए जाने वाले मकानों को नहीं बनाने का आरोप लगाती रही। चुनाव में ये बड़ा मुद्दा रहा। सरकार बदली, तो इन दो महीने में अब तक की सबसे बड़ी और सीएम विष्णुदेव साय की पहली घोषणा पर अमल के लिए पीएम आवास योजना के तहत 8,369 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

पूरी होगी सारी गारंटी
भाजपा के मूल एजेंडे से प्रदेश सरकार का बजट भटका नहीं है। श्री रामलला दर्शन के लिए 35 करोड़ का प्रावधान किया गया है। वहीं शक्ति पीठ परियोजना के लिए 5 करोड़ का प्रावधान किया गया है। महतारी वंदन योजना, जो एक मार्च से महिलाओं को मिलने लगेगा, उसके लिए 3,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

इसी तरह जल जीवन मिशन के लिए 4,500 करोड़, हायर सेकेंड्री स्कूल के लिए 3,952 करोड़, मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना के लिए 3,400 करोड़, शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना के लिए 1,526 करोड़, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए 1,820 करोड़, अमृत मिशन योजना के लिए 700 करोड़, इन्वेस्ट छत्तीसगढ़ के लिए 5 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

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