इंदौर। लंबे समय तक लैपटॉप और कंप्यूटर पर काम करने की आदत युवाओं की सेहत पर असर डाल रही है। गर्दन में दर्द, अकड़न और स्पोंडिलाइटिस जैसी समस्याएं अब कम उम्र के लोगों में भी देखने को मिल रही हैं। इंदौर के एमवाय अस्पताल के फिजियोथेरेपी विभाग में पिछले तीन महीनों के दौरान 25 से 35 वर्ष की उम्र के मरीजों की संख्या में करीब 10 प्रतिशत बढ़ोतरी दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रभावित लोगों में कामकाजी युवतियों और महिलाओं की संख्या अधिक है। इसके अलावा पुरुषों और बच्चों में भी गर्दन से जुड़ी परेशानियां सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, गलत बैठने का तरीका, लंबे समय तक एक ही मुद्रा में काम करना और पोषण संबंधी कमियां इन समस्याओं के प्रमुख कारण हो सकते हैं।
घंटों स्क्रीन के सामने बैठना बन रहा परेशानी की वजह
आजकल बड़ी संख्या में युवा कई घंटे लगातार लैपटॉप या कंप्यूटर पर काम करते हैं। इस दौरान गर्दन को आगे झुकाकर रखना या गलत मुद्रा में बैठना मांसपेशियों और रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।
लंबे समय तक ऐसी स्थिति बने रहने पर गर्दन में दर्द, अकड़न, कंधों में खिंचाव और पीठ में परेशानी हो सकती है। कामकाजी महिलाओं में भी गर्दन के साथ कमर, घुटनों और कंधों के दर्द की शिकायतें बढ़ने की बात सामने आई है।
कैल्शियम और विटामिन की कमी पर भी ध्यान जरूरी
विशेषज्ञों के मुताबिक, कुछ मरीजों में विटामिन डी, विटामिन बी12 और कैल्शियम की कमी भी पाई गई है। हालांकि, इन पोषक तत्वों की कमी और गर्दन के दर्द के बीच संबंध का आकलन मरीज की जांच तथा चिकित्सकीय स्थिति के आधार पर किया जाना चाहिए।
हड्डियों की मजबूती के लिए कैल्शियम महत्वपूर्ण है, जबकि विटामिन डी शरीर को कैल्शियम अवशोषित करने में मदद करता है। वहीं, विटामिन बी12 की कमी से नसों से संबंधित लक्षण भी हो सकते हैं। इसलिए लगातार दर्द या अकड़न होने पर केवल दर्द निवारक उपायों पर निर्भर रहने के बजाय उचित जांच कराना जरूरी है।
गर्दन दर्द से बचने के लिए क्या करें?
लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों को अपनी दिनचर्या में कुछ जरूरी बदलाव करने चाहिए:
- सही पोश्चर अपनाएं: लैपटॉप या कंप्यूटर की स्क्रीन आंखों के स्तर के करीब रखें और गर्दन को लगातार झुकाकर न बैठें।
- बीच-बीच में ब्रेक लें: लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठने के बजाय नियमित अंतराल पर उठकर चलें और हल्की गतिविधि करें।
- नियमित व्यायाम करें: चिकित्सक या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह से गर्दन और कंधों के लिए उपयुक्त व्यायाम करें।
- पोषण पर ध्यान दें: भोजन में कैल्शियम, प्रोटीन और अन्य जरूरी पोषक तत्वों के अच्छे स्रोत शामिल करें।
- लगातार दर्द को नजरअंदाज न करें: दर्द लंबे समय तक बना रहे या बार-बार हो, तो डॉक्टर से परामर्श लें।
यदि गर्दन के दर्द के साथ हाथ में कमजोरी, सुन्नपन या झनझनाहट हो, तो जल्द चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
कम उम्र में बढ़ती समस्या, सावधानी जरूरी
कामकाजी जीवन में स्क्रीन का बढ़ता इस्तेमाल युवाओं की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। ऐसे में सही बैठने की आदत, नियमित शारीरिक गतिविधि और संतुलित आहार पर ध्यान देना जरूरी है। गर्दन में लगातार दर्द या अकड़न को सामान्य थकान मानकर टालना परेशानी बढ़ा सकता है।